
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए केन्द्रीय सहकारिता मंत्रालय ने बहु-राज्य सहकारी समितियों में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन मजबूत करने के लिए बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी (लेखापरीक्षक की रिपोर्ट) आदेश, 2026 (एमएससीएआरओ-2026) को अनिवार्य किया है। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में उठाए गए इस कदम का उद्देश्य सहकारी संस्थाओं में पेशेवर प्रबंधन और सुशासन को बढ़ावा देना है।
बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत केन्द्र सरकार को धारा 73(6) के अंतर्गत बहु-राज्य सहकारी समितियों के लिए लेखापरीक्षा और लेखांकन मानक निर्धारित करने का अधिकार दिया गया है। इसी प्रावधान के तहत भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक तथा बहु-राज्य सहकारी समितियों से प्राप्त सुझावों के आधार पर यह आदेश तैयार किया गया है।
कंपनी लेखापरीक्षक रिपोर्ट आदेश (सीएआरओ) की तर्ज पर तैयार इस व्यवस्था के तहत लेखापरीक्षकों को वित्तीय स्थिति, प्रशासनिक व्यवस्था, सुशासन और वैधानिक अनुपालन से जुड़े निर्धारित मानकों पर ‘हां’ या ‘नहीं’ में जवाब देना होगा। इसके साथ आवश्यक टिप्पणियां भी प्रस्तुत करनी होंगी। इससे लेखापरीक्षा रिपोर्टिंग में एकरूपता आएगी और अनियमितताओं की पहचान आसान होगी।
नई व्यवस्था के तहत केन्द्रीय सहकारी समितियों के पंजीयक (सीआरसीएस) लेखापरीक्षा रिपोर्ट के आधार पर अधिक वित्तीय अथवा प्रशासनिक जोखिम वाली समितियों की पहचान कर सकेंगे। ऐसी समितियों के निरीक्षण और जांच को प्राथमिकता दी जा सकेगी।
इसके अलावा, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए), अतिदेय ऋणों, तरलता, जमाराशियों, अग्रिमों तथा ऋण एवं जमाराशि के पुनर्भुगतान में चूक से संबंधित जानकारी की व्यवस्थित रिपोर्टिंग होगी। इससे वित्तीय संकट के शुरुआती संकेतों की पहचान कर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलेगी।
आदेश में निवेश, शेयर पूंजी, सदस्यता अभिलेखों और धनराशि के उपयोग का सत्यापन भी शामिल है। साथ ही निदेशक मंडल की संरचना, निदेशकों की पात्रता एवं अयोग्यता, वार्षिक आम सभाओं, बोर्ड बैठकों, वैधानिक समितियों और संबंधित पक्षों के साथ लेन-देन की जांच की जाएगी।
एमएससीएआरओ-2026 में प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी का भी प्रावधान है। लेखापरीक्षा संबंधी सूचनाओं को केन्द्रीय सहकारी समितियों के पंजीयक के पोर्टल से जोड़कर स्वचालित जांच, जोखिम मूल्यांकन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी।
जहां लागू हो, वहां साइबर सुरक्षा, ग्राहक पहचान, संदिग्ध लेन-देन की रिपोर्टिंग और धन शोधन निवारण अधिनियम के अनुपालन की भी जांच होगी।
मंत्रालय ने इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया है। प्रारंभिक चरण में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय आकार वाली बड़ी बहु-राज्य सहकारी समितियां इसके दायरे में आएंगी। आगे चलकर 50 करोड़ रुपये से अधिक के निर्धारित वित्तीय मानक वाली समितियों तक इसका विस्तार किया जाएगा।
मंत्रालय के अनुसार, यह पहल सहकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने, सदस्यों के वित्तीय हितों की रक्षा करने और सहकारी क्षेत्र में पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।



