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ईडी ने पोंजी घोटाले में कोऑप्स की संलिप्तता का किया खुलासा

कर्नाटक में 35 हजार से अधिक निवेशकों से 2,459.49 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़े कथित पोंजी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दो सहकारी क्रेडिट सोसायटियों के इस्तेमाल का खुलासा किया है।

ईडी की जांच के मुताबिक, घोटाले से अर्जित करीब 25 करोड़ रुपये इन दोनों सहकारी संस्थाओं के जरिए ट्रांसफर किए गए और उनसे फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) बनाई गईं। इन एफडी का इस्तेमाल बाद में सहयोगियों के नाम पर कर्ज लेने के लिए गारंटी के रूप में किया गया।

ईडी के मंगलुरु सब-जोनल कार्यालय ने 9 अक्टूबर को मंगलुरु की तृतीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। इसमें कथित घोटाले के मुख्य आरोपी शिवानंद सिद्धप्पा नीलन्नवर और उनकी फर्म मेसर्स शिवम एसोसिएट्स सहित पांच आरोपियों एवं संस्थाओं के खिलाफ अभियोजन की मांग की गई है।

ईडी की जांच में सामने आया कि करीब 25 करोड़ रुपये श्रीमाता को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड और धनश्री मल्टीपर्पज को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के जरिए भेजे गए। कथित तौर पर इस राशि से एफडी बनाई गईं, जिन्हें बाद में सहयोगियों के नाम पर कर्ज लेने के लिए गारंटी के रूप में इस्तेमाल किया गया। इन कर्जों के जरिए जमीन के भूखंड खरीदे गए।

जांच के मुताबिक, नीलन्नवर और उनके सहयोगियों ने निवेशकों को हर महीने 3 प्रतिशत निश्चित रिटर्न और नए निवेशक जोड़ने पर 0.5 प्रतिशत रेफरल कमीशन देने का लालच देकर 35 हजार से अधिक लोगों से कुल 2,459.49 करोड़ रुपये जुटाए। यह नेटवर्क कई संस्थाओं और रेफरल एजेंटों के माध्यम से संचालित किया जा रहा था।

ईडी के अनुसार, नए निवेशकों से प्राप्त धन का बड़ा हिस्सा पुराने निवेशकों को भुगतान करने में इस्तेमाल किया गया, जबकि काफी रकम कथित तौर पर निजी लाभ के लिए दूसरी जगह भेज दी गई। निवेशकों की मूल राशि में से 2,125.60 करोड़ रुपये अब भी बकाया बताए गए हैं।

जांच में हाई-रिस्क शेयर ट्रेडिंग से 185.95 करोड़ रुपये के शुद्ध नुकसान का भी पता चला है। इसके अलावा, रियल एस्टेट और परिवार से जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों में निवेश किया गया। करीब 5 करोड़ रुपये कन्नड़ फीचर फिल्म ‘चैंपियन’ के निर्माण के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए।

अगस्त 2026 में बेलगावी, चिक्कोडी और निपानी स्थित आठ परिसरों में तलाशी के दौरान ईडी ने आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए थे। एजेंसी ने कथित अपराध की कमाई से जुड़े 2.02 करोड़ रुपये के बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट को भी फ्रीज किया है।

मुख्य आरोपी नीलन्नवर को 13 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। मामले में आगे की जांच जारी है।

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