
दिल्ली के रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज (आससीएस) ने दिल्ली राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड से जुड़े तीन मामलों की जांच के आदेश दिए हैं। यह कार्रवाई लालित कुमार द्वारा 18 सितंबर 2020 को दायर शिकायत के आधार पर की गई है।
आरसीएस द्वारा 30 सितंबर 2026 को जारी आदेश में दिल्ली सहकारी समितियां अधिनियम, 2003 की धारा 62 के तहत हिमांशु रंजन, आईआरएस, सहायक आयुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
पहला मामला सदस्य सहकारी समितियों को बैंक के शेयर खरीदने के लिए दिए गए ऋण से संबंधित है। निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, इन ऋणों के कारण दिल्ली सरकार की बैंक की शेयर पूंजी में हिस्सेदारी कम होने का मुद्दा उठाया गया है।
दूसरा मामला नांगलोई में बैंक की 715 वर्ग गज भूमि को दिल्ली कोऑपरेटिव मार्केटिंग एंड सप्लाई फेडरेशन को कथित रूप से हस्तांतरित किए जाने से संबंधित है।
तीसरा मामला वर्ष 2009-10 में बैंक के अधिकारियों, चेयरमैन और प्रबंध निदेशक आदि के रिश्तेदारों की कथित अनियमित भर्ती तथा डीडीए के चार फ्लैटों की कथित “ओपन बिड” के माध्यम से खरीद से संबंधित है। निरीक्षण में इन मामलों से बैंक को कथित वित्तीय नुकसान होने का मुद्दा भी उठाया गया था।
इन तीनों मामलों की पहले के.एस. मीणा, आईएएस (सेवानिवृत्त) द्वारा धारा 61 के तहत किए गए निरीक्षण में जांच की गई थी। 3 जुलाई 2025 की निरीक्षण रिपोर्ट में धारा 62 के तहत जांच शुरू करने की सिफारिश की गई थी।
बैंक और संबंधित निदेशकों ने निरीक्षण कार्यवाही को वित्तीय आयुक्त, जीएनसीटीडी के समक्ष चुनौती दी थी। 6 फरवरी 2026 के आदेश में वित्तीय आयुक्त ने धारा 61 के तहत निरीक्षण और निरीक्षण रिपोर्ट की वैधता बरकरार रखी, लेकिन आरसीएस को जांच शुरू करने से पहले संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने का निर्देश दिया।
इसके बाद आरसीएस ने संबंधित पक्षों से उनके विचार आमंत्रित किए और प्राप्त प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद धारा 62 के तहत जांच आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
जांच अधिकारी को आदेश की तारीख से 30 दिनों के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच अधिकारी को 15,000 रुपये का पारिश्रमिक बैंक द्वारा दिया जाएगा।



