
केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने बुधवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण रूपरेखा (एनसीटीएफ) का शुभारंभ किया।
एनसीटीएफ के अभिसरण एवं प्रमाणीकरण पर आयोजित अंतिम राष्ट्रीय स्तरीय परामर्श बैठक को संबोधित करते हुए गुर्जर ने कहा कि इस रूपरेखा की सफलता का वास्तविक आकलन जमीनी स्तर की सहकारी संस्थाओं और उनके सदस्यों पर पड़ने वाले प्रभाव से किया जाएगा।
उन्होंने सहकारी समितियों के सदस्यों, निर्वाचित बोर्ड प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के लिए उनकी भूमिकाओं के अनुरूप अलग-अलग प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने पर जोर दिया। साथ ही, बहुभाषी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित प्रशिक्षण समाधानों को अपनाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने स्थानीय प्रशिक्षकों का नेटवर्क मजबूत करने, मौजूदा बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग करने और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण व्यवस्था विकसित करने की बात कही। उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि भाषा, भौगोलिक स्थिति, लैंगिक असमानता और डिजिटल सुविधाओं की कमी प्रशिक्षण के अवसरों में बाधा नहीं बननी चाहिए। गुर्जर ने मजबूत सहकारी आंदोलन की नींव के रूप में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को सशक्त बनाने पर भी बल दिया।
इस अवसर पर सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष भूटानी ने मानकीकृत पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण पद्धतियों और प्रमाणन प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे एक मजबूत और गुणवत्तापूर्ण सहकारी प्रशिक्षण व्यवस्था तैयार की जा सकेगी। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग, मौजूदा प्रशिक्षण संस्थानों को मजबूत बनाने तथा करीब 8.5 लाख सहकारी संस्थाओं से जुड़े हितधारकों की क्षमता विकसित करने पर भी बल दिया।
भूटानी ने एनसीटीएफ को एकीकृत, व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी रूपरेखा के रूप में विकसित करने के लिए मंत्रालय की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने इस प्रक्रिया में सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी और संस्थागत समन्वय के महत्व को भी रेखांकित किया।
परामर्श बैठक की अध्यक्षता त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) एस.पी. सिंह और सहकारिता मंत्रालय के अपर सचिव सिद्धार्थ जैन ने की।
इस दौरान त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय ने प्रमुख अनुभवों और समेकित सुझावों को प्रस्तुत किया। इसके बाद मसौदा रूपरेखा, संस्थागत जिम्मेदारियों, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों और कार्यान्वयन की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में सहकारी संघों के प्रतिनिधियों, मंत्रालय के अधिकारियों और अन्य प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया। चर्चा का उद्देश्य एनसीटीएफ के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आम सहमति बनाना और सुझावों को व्यावहारिक कदमों में बदलना था।



