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बहुउद्देशीय डेयरी सहकारी समितियां 9 राज्यों की 2,000 ग्राम समितियों से जुड़ेंगी

देश में डेयरी सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी), आनंद, गुजरात के संस्थागत सहयोग से गठित कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन मल्टी-स्टेट लिमिटेड के माध्यम से नौ राज्यों में लगभग 20 हजार बहुउद्देशीय ग्राम सहकारी समितियों को जोड़ने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य मौजूदा दूध संग्रह केंद्रों को एक संगठित सहकारी नेटवर्क के अंतर्गत लाना और छोटे दुग्ध उत्पादकों को सहकारी व्यवस्था से जोड़ना है।

इस पहल के तहत आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में दूध संग्रह से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाओं को एक साझा नेटवर्क के माध्यम से मजबूत किया जाएगा।

इस पहल का सबसे बड़ा उद्देश्य छोटे और सीमांत दुग्ध उत्पादकों को संगठित बाजार तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराना है। ग्राम स्तर पर सहकारी समितियों के माध्यम से दूध एकत्रित होने से किसानों की अपने उत्पाद का उचित और बेहतर मूल्य प्राप्त करने की क्षमता बढ़ेगी। साथ ही, उन्हें बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और संगठित डेयरी बाजार से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह भी डेयरी किसानों के लिए सहकारी व्यवस्था के आर्थिक लाभों पर लगातार जोर देते रहे हैं। उन्होंने एक हालिया संदेश में कहा था कि सहकारिता मंत्रालय की पहलों का सबसे अधिक लाभ दुग्ध किसानों को मिलेगा, जिन्हें खुले बाजार में अक्सर बिचौलियों के कारण उचित मूल्य नहीं मिल पाता।

शाह के अनुसार, खुले बाजार में दूध बेचने वाले किसानों को जहां लगभग 35 रुपये प्रति लीटर मिल सकते हैं, वहीं सहकारी व्यवस्था से जुड़ने पर उन्हें 55 रुपये प्रति लीटर तक प्राप्त हो सकते हैं। हालांकि, वास्तविक भुगतान दूध की गुणवत्ता, वसा एवं वसा रहित ठोस पदार्थों की मात्रा, स्थानीय बाजार और संबंधित सहकारी संस्था की भुगतान नीति पर निर्भर करेगा।

यह पहल केंद्र सरकार के ‘सहकार से समृद्धि’ के व्यापक दृष्टिकोण का भी हिस्सा है। इसके माध्यम से मौजूदा सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने, उनकी आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

एनडीडीबी के संस्थागत मार्गदर्शन में प्रस्तावित नेटवर्क से दूध संग्रह, प्रसंस्करण और विपणन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिल सकती है। इससे छोटे उत्पादकों को संगठित डेयरी बाजार से जुड़ने का अवसर मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं आय के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं।

हालांकि, इस महत्वाकांक्षी पहल की सफलता प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शी भुगतान व्यवस्था, पेशेवर प्रबंधन और गांव स्तर पर समितियों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करेगी।

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