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केरल की तीन सहकारी संस्थाओं में धोखाधड़ी के मामलों में ईडी की बड़ी कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोच्चि क्षेत्रीय कार्यालय ने केरल में सहकारी बैंकिंग धोखाधड़ी के तीन मामलों में कार्रवाई करते हुए लगभग 2.07 करोड़ रुपये की सावधि जमा (एफडी) और बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है।

एजेंसी ने 7 अक्टूबर 2026 को इन मामलों से जुड़े 17 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इसका उद्देश्य कथित अपराध से अर्जित आय का पता लगाना और प्रभावित सहकारी सदस्यों तथा जमाकर्ताओं को राहत दिलाने के लिए धन की वसूली करना है।

ईडी की 8 अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एजेंसी केरल की सहकारी समितियों और बैंकों में कथित धोखाधड़ी से जुड़े 27 मामलों की जांच कर रही है। इन मामलों में लगभग 550 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और संदिग्ध अपराध से अर्जित आय का अनुमान है। इससे हजारों सदस्यों और जमाकर्ताओं को नुकसान पहुंचा है।

ताजा कार्रवाई में अंगमाली अर्बन को-ऑपरेटिव सोसायटी, मलप्पुरम स्थित थेन्नाला सर्विस को-ऑपरेटिव बैंक और त्रिशूर स्थित कुट्टनेल्लूर सर्विस को-ऑपरेटिव बैंक शामिल हैं।

अंगमाली मामले में लगभग 96.74 करोड़ रुपये के 422 ऋणों की जांच की गई, जिनके लिए 65 सदस्यों की 108 अचल संपत्तियां गिरवी रखी गई थीं। इनमें 33.82 करोड़ रुपये के 159 ऋणों में गंभीर अनियमितताएं मिलीं।

इनमें मूल संपत्ति दस्तावेजों का गायब होना, बंधक का पंजीकरण नहीं होना, अधूरे आवेदन और कथित तौर पर अपात्र या अस्तित्वहीन लोगों को ऋण देना शामिल है। ईडी ने 38 संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए तथा 1.82 करोड़ रुपये की दो एफडी फ्रीज कीं। यह जांच लगभग 55 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़ी केरल पुलिस की प्राथमिकी के आधार पर शुरू हुई थी।

थेन्नाला बैंक मामले में एफडी का भुगतान नहीं करने, फर्जी किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और भूमि बंधक ऋणों की जांच हो रही है। संदिग्ध अपराध से अर्जित आय लगभग 10 करोड़ रुपये है। ईडी के अनुसार, कुछ ऋण फर्जी या बेनामी नामों पर और अनिवार्य मंजूरी के बिना दिए गए। एजेंसी ने 24.50 लाख रुपये की 20 एफडी और बैंक खातों को फ्रीज किया तथा दो संपत्तियों के दस्तावेज बरामद किए।

कुट्टनेल्लूर बैंक मामले में ग्राहकों की जानकारी और सहमति के बिना उनकी संपत्तियां तीसरे पक्ष के ऋणों के लिए गिरवी रखने के आरोपों की जांच की जा रही है। कथित तौर पर मृत्यु प्रमाणपत्र, पहचान पत्र और संपत्ति मूल्यांकन रिपोर्ट सहित जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। ईडी के अनुसार, इन अनियमितताओं से बैंक को 27 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।

ईडी ने बताया कि तीनों मामलों में जांच जारी है। एजेंसी का ध्यान कथित अवैध धन का पता लगाने और प्रभावित सदस्यों तथा जमाकर्ताओं को उनकी रकम वापस दिलाने पर है।

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