
छत्तीसगढ़ के बस्तर में आयोजित सहकारिता मंत्रालय की दो दिवसीय 9वीं राष्ट्रीय समीक्षा कार्यशाला में सहकारी क्षेत्र की पहलों को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना और राज्य-विशिष्ट रणनीतियां तैयार करने पर जोर दिया गया।
8 और 9 अक्टूबर को ‘सहकार से समृद्धि-आगे की राह: सहकारिता रूपांतरण से व्यापक प्रभाव की ओर’ विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों, सहकारिता पंजीयकों और राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
समापन सत्र में सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि सहकारी विकास का एक ही मॉडल सभी राज्यों पर लागू नहीं किया जा सकता। प्रत्येक राज्य की परिस्थितियों, चुनौतियों और संस्थागत जरूरतों के अनुसार समाधान विकसित करना जरूरी है। उन्होंने राज्यों से कार्यशाला के बाद अपनी प्राथमिकताओं के अनुरूप समयबद्ध कार्ययोजना बनाने, जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करने और नियमित निगरानी व्यवस्था स्थापित करने का आग्रह किया।
डॉ. भूटानी ने राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल), राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एनसीओएल) और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) के माध्यम से किसानों और सहकारी सदस्यों को व्यापक बाजारों तक पहुंच तथा बेहतर मूल्य दिलाने की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को उर्वरक व्यवसाय सहित नए व्यावसायिक अवसरों से जोड़कर उनकी वित्तीय स्थिरता मजबूत करने की आवश्यकता भी बताई।
सहकारी बैंकिंग पर चर्चा करते हुए उन्होंने साइबर सुरक्षा, आधुनिक डिजिटल सेवाओं और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया। नाबार्ड द्वारा विकसित किए जा रहे एकरूप कोर बैंकिंग समाधान (सीबीएस) प्लेटफॉर्म की सराहना करते हुए उन्होंने बताया कि इसकी निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने के करीब है। इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग के विस्तार को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
उन्होंने अगले दो से तीन वर्षों में लगभग 95,000 नई सहकारी संस्थाओं के गठन का लक्ष्य हासिल करने के लिए मौजूदा पैक्स के विभाजन, नई समितियों के गठन और सदस्यता विस्तार में तेजी लाने का आह्वान किया। पैक्स कम्प्यूटरीकरण के पहले चरण के सभी घटकों को दिसंबर 2026 तक पूरा करने तथा लंबित ऑडिट कार्यों को समय पर संपन्न करने पर भी जोर दिया गया।
कार्यशाला में डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों के विस्तार, गांवों में अनौपचारिक दुग्ध संग्रहण व्यवस्थाओं को संगठित सहकारी ढांचे में लाने तथा विकेंद्रीकृत अन्न भंडारण अवसंरचना विकसित करने पर भी चर्चा हुई। मंत्रालय वैकल्पिक कृषि विपणन और प्लेज फाइनेंस मॉडल की संभावनाएं तलाश रहा है, ताकि किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके। सचिव ने स्पष्ट किया कि ये विकल्प न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था का विकल्प नहीं, बल्कि उसके पूरक होंगे।
मंत्रालय अगले दो से तीन महीनों में संभावित मॉडल राज्यों के साथ साझा करने और चयनित जिलों में पायलट परियोजनाएं शुरू करने पर विचार करेगा। अगली राष्ट्रीय समीक्षा कार्यशाला जनवरी 2027 में महाबलीपुरम, तमिलनाडु में आयोजित करने का प्रस्ताव है।



