
बैठक की संयुक्त अध्यक्षता लिनैक के महानिदेशक डॉ. मनोज कुमार और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के निदेशक (कार्मिक एवं प्रशासन) विकास उपाध्याय ने की। इस अवसर पर कार्यक्रम समन्वयक एवं उप निदेशक श्रीमती स्वेता कुजूर भी उपस्थित रहीं। ओजेटी कार्यक्रम में भाग ले रहे सभी 20 नवनियुक्त कार्यक्रम अधिकारियों ने समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया।
अधिकारियों को संबोधित करते हुए डॉ. मनोज कुमार ने सहकारी क्षेत्र की बेहतर समझ विकसित करने में व्यावहारिक अनुभव के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र आधारित प्रशिक्षण से अधिकारियों को विभिन्न सहकारी क्षेत्रों की जमीनी वास्तविकताओं को समझने, कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों की पहचान करने और विकास योजनाओं को लागू करने की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलती है।
पहले तीन महीने का प्रशिक्षण चरण पूरा होने के बाद सभी 20 कार्यक्रम अधिकारी अब ओजेटी के अगले तीन महीने के चरण के लिए अपनी-अपनी निर्धारित तैनाती पर जाएंगे। दूसरे चरण में उन्हें विभिन्न सहकारी संस्थाओं के कामकाज, कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और क्षेत्र विशेष की चुनौतियों को समझने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा। इससे उनका क्षेत्रीय अनुभव और व्यापक होने की उम्मीद है।
इस सुव्यवस्थित प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे सक्षम कार्यक्रम अधिकारियों का समूह तैयार करना है, जिनके पास संस्थागत ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी हो। सहकारी क्षेत्र में विकास पहलों के विस्तार तथा किसानों, सदस्यों और जमीनी स्तर की संस्थाओं तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में अधिकारियों की भूमिका को देखते हुए यह प्रशिक्षण महत्वपूर्ण है।
समीक्षा बैठक में पहले चरण के दौरान अधिकारियों द्वारा प्राप्त अनुभवों और सीख का आकलन किया गया। साथ ही, उनके व्यावसायिक विकास में क्षेत्रीय भागीदारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण की भूमिका को भी रेखांकित किया गया। ओजेटी के अगले चरण में अधिकारी अपने पूर्व अनुभवों को आगे बढ़ाते हुए नई सहकारी संस्थाओं और विभिन्न परिचालन परिस्थितियों को समझेंगे तथा अपनी कार्यक्षमता को और मजबूत करेंगे।



