
महाराष्ट्र के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में निदेशकों के 10 वर्ष के कार्यकाल का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में बंबई उच्च न्यायालय की कोल्हापुर पीठ ने सतारा जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव से जुड़े एक मामले में लगातार 10 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके निदेशकों को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहराया है। इस फैसले का असर राज्य के अन्य सहकारी बैंकों के चुनावों पर भी पड़ सकता है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, न्यायमूर्ति शैलेश ब्रह्मे ने बैंक के निवर्तमान उपाध्यक्ष अनिल देसाई और निवर्तमान निदेशक राजेंद्र राजपुरे की उम्मीदवारी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।
दोनों के नामांकन पत्र 5 अक्टूबर को निर्वाचन अधिकारियों ने स्वीकार किए थे। इसके बाद शिवसेना के संजय मोरे और चंद्रकांत कोकाटे ने क्रमशः राजेंद्र राजपुरे और अनिल देसाई की उम्मीदवारी को चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि दोनों निदेशक लगातार 10 वर्ष से अधिक का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं, इसलिए वे चुनाव लड़ने के पात्र नहीं हैं।
संजय मोरे ने भारतीय सहकारिता के संवाददाता को फोन पर अदालत के फैसले की पुष्टि की। हालांकि, उन्होंने बताया कि लिखित आदेश अभी तक उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं हुआ है। दूसरी ओर, अनिल देसाई ने भारतीय सहकारिता से कहा कि आदेश की प्रति मिलने के बाद वे इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देंगे।
यह विवाद कोल्हापुर जिला शहरी बैंक सहकारी संघ और 26 अन्य सहकारी बैंकों की ओर से दायर याचिका के कारण भी महत्वपूर्ण है। इस याचिका में बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 10ए(2ए)(i) के तहत निदेशकों के कार्यकाल को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक की व्याख्या को चुनौती दी गई है।
बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत सहकारी बैंकों के निदेशकों का अधिकतम लगातार कार्यकाल 8 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष किया गया था। यह संशोधन 1 अगस्त 2025 से प्रभावी हुआ। हालांकि, अध्यक्षों और पूर्णकालिक निदेशकों को इस प्रावधान से बाहर रखा गया है।
याचिकाकर्ता बैंकों का तर्क है कि संशोधन केवल भविष्य में लागू होना चाहिए और 1 अगस्त 2025 से पहले पूरा किया गया कार्यकाल पिछली अवधि से जोड़कर नहीं गिना जाना चाहिए।
उच्च न्यायालय ने 12 दिसंबर 2025 को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। बाद में 23 जून 2026 को जारी सुधार आदेश में स्पष्ट किया गया कि 1 अगस्त 2025 को या उसके बाद लगातार 10 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले निदेशक भी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होंगे। हालांकि, मुख्य याचिका पर अंतिम निर्णय अभी लंबित है।
इस बीच, महाराष्ट्र के सहकारिता विभाग ने स्पष्ट किया था कि निर्वाचन अधिकारी केवल 10 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के आधार पर किसी उम्मीदवार का नामांकन खारिज नहीं कर सकते। यह स्पष्टीकरण 18 अगस्त 2026 को विधि एवं न्याय विभाग की कानूनी राय के बाद जारी किया गया था।
सतारा बैंक मामले में आए फैसले, अनिल देसाई की उच्चतम न्यायालय जाने की घोषणा और 26 सहकारी बैंकों की लंबित याचिका ने महाराष्ट्र के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में निदेशकों की चुनावी पात्रता के मुद्दे को और महत्वपूर्ण बना दिया है।



