
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सोमवार को नई दिल्ली में भारतीय सशस्त्र बलों के लिए ‘भारत चावल’ का शुभारंभ किया। इसके तहत राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों को गुणवत्तापूर्ण चावल की आपूर्ति करेगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सेना के आपूर्ति डिपो तक सीधे उच्च गुणवत्ता वाला चावल पहुंचाना है। इसमें लद्दाख और पूर्वोत्तर के दूरदराज एवं दुर्गम क्षेत्रों में स्थित डिपो भी शामिल हैं। इस पहल के तहत नेफेड को रक्षा बलों की खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी गई है।
रक्षा मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार चावल की मिलिंग की जाएगी और आपूर्ति से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच होगी। परिवहन एवं भंडारण की सुविधा के लिए चावल की आपूर्ति 10 किलोग्राम और 30 किलोग्राम के बैग में की जाएगी।
शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने ‘भारत चावल’ को किसान के खेत से सैनिक की थाली तक पहुंचने वाले विश्वास का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘जय जवान, जय किसान’ की भावना को साकार करती है और दर्शाती है कि किसानों की मेहनत किस प्रकार देश के सैनिकों की ताकत बनती है।
उन्होंने कहा कि सैन्य तैयारियां केवल हथियारों और तकनीक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मजबूत लॉजिस्टिक्स, आपूर्ति श्रृंखला, भंडारण सुविधाओं और समय पर रसद की उपलब्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आधुनिक युद्ध में लॉजिस्टिक्स स्वयं एक महत्वपूर्ण सैन्य शक्ति बन चुका है।
इस अवसर पर भारतीय सेना और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के बीच पांच वर्ष के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए गए।
कार्यक्रम में थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव संजीव चोपड़ा तथा रक्षा मंत्रालय, एफसीआई, नेफेड और सहकारिता क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
यह पहल भारतीय सेना, एफसीआई, नेफेड और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के बीच लगभग 18 महीने तक चले समन्वय का परिणाम है।



