
नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनयूसीएफडीसी) ने वित्त वर्ष 2025-26 में 3.12 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है। वित्त वर्ष 2024-25 में संस्था को 92 लाख रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था।
वित्त वर्ष 2025-26 की निदेशक रिपोर्ट के अनुसार, संस्था की कुल आय पिछले वित्त वर्ष के 7.39 करोड़ रुपये से बढ़कर 14.73 करोड़ रुपये हो गई, जो लगभग 99.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। वहीं, परिचालन से प्राप्त राजस्व भी 7.32 करोड़ रुपये से बढ़कर 14.69 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
एनयूसीएफडीसी के पूंजी आधार में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। 31 मार्च 2026 तक संस्था की चुकता इक्विटी शेयर पूंजी बढ़कर 300.96 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले वर्ष यह 117.95 करोड़ रुपये थी। इसी अवधि में संस्था की कुल परिसंपत्तियां भी 136.81 करोड़ रुपये से बढ़कर 305.86 करोड़ रुपये हो गईं, जो लगभग 123.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती हैं।
मार्च 2024 में औपचारिक उद्घाटन के बाद से एनयूसीएफडीसी शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक साझा संस्थागत और तकनीकी मंच विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान संस्था ने शहरी सहकारी बैंकों और अन्य सहकारी संस्थाओं से इक्विटी पूंजी जुटाने के साथ-साथ क्षेत्र के लिए साझा तकनीकी एवं डिजिटल बुनियादी ढांचा तैयार करने की दिशा में कई पहल कीं।
इन पहलों के तहत संस्था ने ‘सहकार सीबीएस’ के लिए कोर बैंकिंग समाधान प्रदाताओं का चयन कर उन्हें सूचीबद्ध किया। इसके अलावा, कोऑप कुंभ 2025 के दौरान ‘सहकार डिजीपे’ और ‘सहकार डिजीलोन’ की शुरुआत की। संस्था ने सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के साथ सहयोग किया और आईआईएमए वेंचर्स के साथ मिलकर ‘भारत कोऑपैथॉन 2025’ भी शुरू किया।
एनयूसीएफडीसी ने भारतीय रिजर्व बैंक के साथ मिलकर ‘मिशन सक्षम’ पर भी काम शुरू किया है। इस क्षेत्रव्यापी क्षमता निर्माण कार्यक्रम को संस्था के ‘सहकार पाठशाला’ मंच के माध्यम से संचालित करने की योजना है। इसके अतिरिक्त, सदस्य बैंकों के लिए अनुपालन निगरानी सेवाएं भी शुरू की गई हैं।
आगे की योजनाओं में साझा साइबर सुरक्षा ढांचा, क्लाउड होस्टिंग, डिजिटल बैंकिंग समाधान और विशेष पेशेवर सेवाएं उपलब्ध कराना शामिल है। इसका विशेष लाभ छोटे शहरी सहकारी बैंकों को मिलने की उम्मीद है, जिन्हें बढ़ती तकनीकी और नियामकीय आवश्यकताओं को स्वतंत्र रूप से पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
निदेशक रिपोर्ट के अनुसार, एनयूसीएफडीसी ने स्व-नियामक संगठन (एसआरओ) का दर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। हालांकि, इसके लिए आवश्यक नियामकीय मंजूरी मिलना अभी बाकी है।



