
महामारी के बाद के कठिन दौर और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की नियामकीय पाबंदियों से उबरते हुए मुंबई स्थित भारत को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड ने न केवल घाटे से उबरकर मुनाफा हासिल किया है, बल्कि कारोबार के मोर्चे पर भी शानदार प्रदर्शन किया है।
बैंक को वित्त वर्ष 2022-23 में 149.39 करोड़ रुपये का भारी घाटा हुआ था। हालांकि, इसके बाद बैंक ने लगातार सुधार करते हुए वित्त वर्ष 2023-24 में 11.78 करोड़ रुपये, 2024-25 में 36.05 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2025-26 में 77.01 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया।
इस वित्तीय सुधार के साथ बैंक ने वर्ष 2025 में आरबीआई के सुपरवाइजरी एक्शन फ्रेमवर्क (एसएएफ) से बाहर निकलकर सामान्य बैंकिंग दर्जा भी हासिल किया।
30 सितंबर 2026 के अनऑडिटेड आंकड़ों के अनुसार, बैंक का कुल कारोबार 20,812.02 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो मार्च 2026 के अंत में 19,845.79 करोड़ रुपये था। इस तरह केवल छह महीनों में बैंक के कारोबार में लगभग 966 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई।
इस अवधि में बैंक की कुल जमा राशि 12,470.89 करोड़ रुपये और कुल अग्रिम 8,341.13 करोड़ रुपये रहे। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक का परिचालन लाभ 144.51 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
बैंक की पूंजी स्थिति में भी सुधार हुआ है। 31 मार्च 2026 तक पूंजी पर्याप्तता अनुपात (सीआरएआर) बढ़कर 14.17 प्रतिशत हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2022-23 में यह 12.63 प्रतिशत था। विशेष बात यह है कि बैंक ने लगातार छह वर्षों तक ‘A’ ऑडिट ग्रेड बरकरार रखा है। बेहतर वित्तीय प्रदर्शन के चलते बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 10 प्रतिशत लाभांश भी घोषित किया।
वित्तीय मजबूती के साथ बैंक ने ग्राहक सेवाओं, तकनीकी नवाचार, जोखिम प्रबंधन और साइबर सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया है। डिजिटल पहलों, आईटी जोखिम प्रबंधन और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बैंक को इंडियन बैंक्स एसोसिएशन, ग्लोबल फिनटेक इनोवेशन अवॉर्ड्स और ऑल इंडिया को-ऑपरेटिव बैंकिंग समिट 2025 सहित विभिन्न मंचों पर सम्मानित किया गया है।
बैंक ने अपनी सफलता का श्रेय ग्राहकों के विश्वास और निरंतर सहयोग को दिया है।



