
सहकारिता मंत्रालय ने सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज (सीआरसीएस) कार्यालय को विभिन्न सहकारी सेवाओं के लिए आधार आधारित प्रमाणीकरण की अनुमति दी है।
हालांकि, आधार प्रमाणीकरण पूरी तरह स्वैच्छिक होगा और आधार सत्यापन नहीं कराने पर किसी भी व्यक्ति को संबंधित सेवाओं से वंचित नहीं किया जा सकेगा।
23 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, आधार प्रमाणीकरण फॉर गुड गवर्नेंस (सोशल वेलफेयर, इनोवेशन, नॉलेज) रूल्स, 2020 और आधार अधिनियम, 2016 के तहत सीआरसीएस कार्यालय को आधार आधारित ‘यस/नो’ और ई-केवाईसी प्रमाणीकरण की अनुमति दी गई है।
इस व्यवस्था के तहत सहकारी समितियों के प्रवर्तकों और बोर्ड सदस्यों की पहचान समिति के पंजीकरण, उपनियमों में संशोधन तथा अन्य संबंधित सेवाओं के दौरान की जा सकेगी। इसके अलावा, समिति के सदस्यों के पंजीकरण, व्यक्तिगत विवरणों के अद्यतन और चुनाव के दौरान भी आधार प्रमाणीकरण का उपयोग किया जा सकेगा।
अधिसूचना में सीआरसीएस अधिकारियों और अन्य सेवा प्रदाताओं को प्रशासनिक कार्यों के लिए भी आधार प्रमाणीकरण की अनुमति दी गई है। इस पहल का उद्देश्य फर्जी पहचान, दोहराव और धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना तथा सहकारी समितियों के रिकॉर्ड की सटीकता सुनिश्चित करना है।
हालांकि, आधार के विकल्प के रूप में कई अन्य पहचान दस्तावेजों को भी मान्यता दी गई है। इनमें फोटोयुक्त बैंक या डाकघर पासबुक, पैन कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), पासपोर्ट, राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, किसान फोटो पासबुक और ड्राइविंग लाइसेंस शामिल हैं। मंत्रालय अन्य स्वीकार्य पहचान दस्तावेज भी निर्धारित कर सकता है।
अधिसूचना के अनुसार, आधार प्रमाणीकरण से पहले संबंधित व्यक्ति की सूचित सहमति लेना अनिवार्य होगा। अधिकारियों को आधार धारकों को वैकल्पिक पहचान माध्यमों की जानकारी भी देनी होगी, ताकि आधार सत्यापन नहीं कराने की स्थिति में भी उन्हें सहकारी सेवाओं का लाभ लेने में कोई परेशानी न हो।
इस कदम से सहकारी समितियों के पंजीकरण, सदस्यता प्रबंधन और चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं में पहचान सत्यापन अधिक सरल और पारदर्शी होने की उम्मीद है।
यह अधिसूचना सहकारिता मंत्रालय के संयुक्त सचिव एवं केंद्रीय सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार शिव पाल सिंह द्वारा जारी की गई है। यह राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से प्रभावी हो गई है।



