
कोऑपरेटिव बैंक ऑफ इंडिया (कोबी) ने 27 से 29 अप्रैल तक एसीएसटीआई, शिमला में “इनोवेटिव टेक्नोलॉजी एंड आरबीआई/नाबार्ड नॉर्म्स” विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में चार राज्यों के सहकारी बैंकिंग पेशेवरों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन हिमाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन तथा नेशनल फेडरेशन ऑफ अर्बन कोऑपरेटिव बैंक्स एंड क्रेडिट सोसाइटीज के उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह श्याम ने किया।
अपने मुख्य संबोधन में देवेंद्र सिंह श्याम ने सहकारी बैंकों में आईटी सिस्टम और आरबीआई-नाबार्ड दिशानिर्देशों के अनुपालन में मौजूद कमियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि तकनीक को समय पर नहीं अपनाने के कारण सहकारी बैंक बढ़ती प्रतिस्पर्धा, साइबर धोखाधड़ी और नियामकीय दंड जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जिससे आम जनता का विश्वास भी प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल परिवर्तन और साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम बेहद जरूरी हैं।
देवेंद्र सिंह श्याम ने हिमाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक की दो प्रमुख योजनाओं, महिला उद्यमियों के लिए बिना गारंटी ऋण और शिक्षा केंद्रित वित्तीय योजनाओं, का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं में लगभग 100 प्रतिशत रिकवरी दर्ज की गई है और इन्हें जनता का अच्छा समर्थन मिला है।
28 अप्रैल को प्रतिभागियों ने बैंक का दौरा कर इन योजनाओं के क्रियान्वयन को नजदीक से समझा। कई प्रतिभागियों ने अपने राज्यों में इन मॉडलों को अपनाने में रुचि दिखाई।
उद्घाटन सत्र को हिमाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक के चेयरमैन संजय सिंह चौहान ने भी संबोधित किया। उन्होंने सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए आधुनिक तकनीक को “समय की आवश्यकता” बताया और विशेषज्ञों से बैंकों की परिचालन संबंधी समस्याओं पर व्यावहारिक प्रशिक्षण देने का आग्रह किया।
कोर्स डायरेक्टर डॉ. वी.के. दुबे ने सक्रिय भागीदारी और ज्ञान साझा करने के महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम में एस.सी. प्रधान ने साइबर सुरक्षा, गोपाल धाकन ने नियामकीय अनुपालन तथा हिमाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न तकनीकी विषयों पर सत्र लिए।
प्रशिक्षण में साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क, फ्रॉड डिटेक्शन, आरबीआई मानदंड, डिजिटल बैंकिंग सिस्टम जैसे एनईएफटी, आरटीजीएस, यूपीआई, आईएमपीएस, मोबाइल बैंकिंग नवाचार जैसे यूपीआई लाइट और 123 पे, तथा माइक्रो एटीएम और पीओएस सिस्टम जैसी आधुनिक भुगतान सेवाओं पर विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में कुल 21 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और प्रशिक्षण की गुणवत्ता तथा उपयोगिता की सराहना की। कई प्रतिभागियों ने कार्यक्रम की अवधि बढ़ाने का सुझाव भी दिया।
समापन सत्र में एसीएसटीआई के अधिकारियों, जिनमें कोर्स कोऑर्डिनेटर मेघा ठाकुर भी शामिल थीं, ने प्रतिभागियों से फीडबैक लिया और भविष्य में ऐसे और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और प्रशिक्षण किट वितरित किए गए।
यह कार्यक्रम तकनीक अपनाने, नियामकीय अनुपालन और कौशल विकास के माध्यम से भारत के सहकारी बैंकिंग तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



