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केंद्र की नई योजना: बढ़ई-प्लंबर के लिए सहकारी समिति बनाने की तैयारी

देश में सहकारिता आंदोलन को सेवा क्षेत्र तक विस्तार देने के लिए केंद्र सरकार बढ़ई, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन और तकनीशियन जैसे कुशल कामगारों के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समिति बनाने की दिशा में काम कर रही है।

इस प्रस्ताव की समीक्षा सहकारिता सचिव आशीष कुमार भुटानी की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में की गई, जिसमें इस पहल के ढांचे, विस्तार और संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ।

प्रस्तावित सहकारी समिति का उद्देश्य असंगठित और बिखरे हुए सेवा क्षेत्र के कामगारों को एक संगठित ढांचे में लाना है। इससे न केवल उनकी आय में स्थिरता आएगी, बल्कि सेवा की गुणवत्ता में सुधार होगा और उन्हें एक साझा मंच भी मिलेगा। वर्तमान में ये कामगार प्रायः व्यक्तिगत रूप से कार्य करते हैं, जिससे उनकी सौदेबाजी क्षमता सीमित रहती है।

बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि किस प्रकार इन कामगारों को सहकारी तंत्र से जोड़कर उन्हें संस्थागत वित्त, बीमा कवर और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सेवाएं प्रदान करने की सुविधा दी जा सकती है।

यह पहल “सहकार से समृद्धि” के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आगे बढ़ा रहे हैं। इस दृष्टिकोण के तहत सहकारिताओं को समावेशी विकास और रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।

प्रस्तावित सेवा क्षेत्र की यह सहकारी समिति गिग और असंगठित अर्थव्यवस्था में काम करने वाले लाखों कामगारों के लिए स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करने और उनकी आय बढ़ाने में सहायक हो सकती है। साथ ही, इससे उपभोक्ताओं को भरोसेमंद और मानकीकृत सेवाएं मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

यह पहल कृषि और ऋण जैसे पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़ते हुए सहकारिता के दायरे को नए क्षेत्रों तक ले जाने की रणनीति का हिस्सा है। इससे पहले सरकार ने नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड, भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड और नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड जैसी राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं की स्थापना की है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम दिए हैं।

इसी क्रम में “सहकार टैक्सी” जैसी पहल भी शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य ड्राइवरों को बेहतर आय, कम कमीशन और पारदर्शी व्यवस्था प्रदान करना है।

कुल मिलाकर, केंद्र सरकार की ये पहलें सहकारिता क्षेत्र में एक बड़े बदलाव का संकेत देती हैं। प्रस्तावित सेवा सहकारी समिति से देश के सेवा क्षेत्र में काम करने वाले लाखों लोगों को सम्मान, स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।

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