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जयपुर बैठक में भंडारण, पैक्स और ग्रामीण विकास पर जोर

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के मंत्र के अनुरूप देश में सहकारी क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत सहकारिता मंत्रालय ने क्षेत्रीय कार्यशालाओं की श्रृंखला शुरू की है। इसी क्रम में पहली क्षेत्रीय कार्यशाला जयपुर, राजस्थान में आयोजित की गई, जिसमें सहकारी क्षेत्र में परिवर्तनकारी सुधारों को गति देने पर व्यापक चर्चा हुई।

माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में आयोजित इस पहल का उद्देश्य आधुनिक अनाज भंडारण सुविधाओं को किसानों के निकटतम स्तर तक पहुँचाना, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को सशक्त बनाना, सहकारी गतिविधियों में विविधता लाना और सहकारी संस्थाओं के सदस्यों के कल्याण को बढ़ावा देना है।

कार्यशाला में भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक – नाबार्ड, राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं तथा विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह मंच नीतिगत समीक्षा, प्रगति आकलन और जमीनी स्तर पर सहकारी ढांचे को मजबूत करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजनाओं के निर्माण का महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ।

बैठक में प्रमुख सहकारी पहलों की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों पर चर्चा की गई। विशेष रूप से पैक्स, डेयरी और मत्स्य सहकारी संस्थाओं के विस्तार, आधुनिकीकरण और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया। साथ ही देशभर में भंडारण अवसंरचना के विस्तार और प्रभावी संचालन के लिए व्यावहारिक रणनीतियों को अंतिम रूप देने पर भी विचार किया गया।

कार्यशाला के एक अहम सत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना की प्रगति की समीक्षा की गई, जिसमें ऋण स्वीकृति, भूमि चयन, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और क्रियान्वयन की निगरानी जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई। राज्यों ने सितंबर 2026 और 2027 तक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अपनी कार्ययोजनाएँ प्रस्तुत कीं।

इसके अलावा, भारतीय खाद्य निगम, राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ – नाफेड, राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ – एनसीसीएफ, केंद्रीय भंडारण निगम तथा राज्य भंडारण निगमों के प्रतिनिधियों ने गोदाम विकास की प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं।

कार्यशाला में वेयरहाउसिंग विकास एवं विनियामक प्राधिकरण (डब्ल्यूडीआरए) के ढांचे के अंतर्गत पैक्स को जोड़ने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और सहकारी संस्थाओं को अधिक लाभ पहुंचाने पर भी चर्चा हुई। साथ ही, वर्ष 2026–27 के लिए बहुउद्देशीय पैक्स के गठन और उनके व्यवसाय विस्तार की रणनीतियों पर राज्यों ने अपने लक्ष्य साझा किए।

डेयरी और मत्स्य सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने, सदस्यता बढ़ाने और टिकाऊ मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण पर भी विशेष जोर दिया गया। सहकारिता मंत्रालय ने इस अवसर पर सहकारी क्षेत्र को आधुनिक, पारदर्शी और पेशेवर बनाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

जयपुर में आयोजित यह कार्यशाला सहकारी सुधारों को नई दिशा देने और “सहकार से समृद्धि” के लक्ष्य को तेजी से आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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