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‘सहकारिता से समृद्धि’ का संदेश लेकर अमेरिका पहुंची पीएचडी टीम

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स की टास्क फोर्स ऑन कोऑपरेटिव्स के अध्यक्ष दिलीप संघानी 16 सहकारिता नेताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ अमेरिका के अध्ययन दौरे पर हैं। इस दौरे का उद्देश्य भारतीय सहकारिता आंदोलन को और सशक्त बनाने के लिए वैश्विक अनुभवों, नवाचारों और सफल सहकारी मॉडलों का अध्ययन करना है।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में संघानी ने इस यात्रा को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि प्रतिनिधिमंडल अमेरिका में सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली, सर्वोत्तम प्रबंधन पद्धतियों और आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं का अध्ययन कर रहा है।

दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने वाशिंगटन डीसी का भ्रमण किया तथा सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाने और किसानों को सशक्त करने से जुड़ी विभिन्न पहलों की जानकारी प्राप्त की।

वाशिंगटन दौरे के बाद प्रतिनिधिमंडल न्यूयॉर्क सहित अन्य स्थानों का भी दौरा करेगा। प्रतिनिधिमंडल 6 जून को भारत लौटेगा।

अमेरिका रवाना होने से पहले नई दिल्ली स्थित इफको सदन में बातचीत के दौरान संघानी ने कहा था कि ‘सहकार से समृद्धि’ का विचार नवाचारी और परिवर्तनकारी है तथा पश्चिमी देशों के अनेक लोग अभी भी इसकी व्यापक संभावनाओं से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन दौरा प्रतिनिधिमंडल को यह बताने का अवसर देगा कि सहकारिता मॉडल किस प्रकार समावेशी विकास और सामुदायिक सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

संघानी ने ‘सहकार से समृद्धि’ की अवधारणा को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए इसे किसानों, ग्रामीण समुदायों और सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

वाशिंगटन डीसी से व्हाट्सएप कॉल पर बातचीत में संघानी ने कहा कि यह अनुभव इस विश्वास को और मजबूत करता है कि सहकारिता केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि सामूहिक विकास, आत्मनिर्भरता और समृद्धि का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मॉडलों और नवाचारी प्रथाओं का अध्ययन भारत के सहकारिता क्षेत्र को अधिक आधुनिक, प्रभावी और किसान-केंद्रित बनाने में सहायक होगा।

प्रतिनिधिमंडल ने वाशिंगटन डीसी स्थित अमेरिकी संसद भवन (यूएस कैपिटल) सहित कई महत्वपूर्ण स्थलों का भी दौरा किया। संघानी ने अध्ययन यात्रा को अत्यंत ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि इससे भारत के सहकारिता आंदोलन को अधिक सशक्त, आधुनिक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के प्रयासों को बल मिलेगा।

यह दौरा ‘सहकार से समृद्धि’ के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है तथा सहकारिता क्षेत्र में सुशासन, नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए देशों के बीच ज्ञान-साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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