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सहकारी सुधारों को व्यापक स्तर पर अपनाने की जरूरत: संघानी

इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने सहकारी संस्थाओं और किसानों से केंद्र सरकार की सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न पहलों को सक्रिय रूप से अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इन प्रयासों के माध्यम से सहकारिता क्षेत्र को अधिक मजबूत, पारदर्शी और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

महुवा तालुका सहकारी खरीद एवं बिक्री संघ की वार्षिक आम सभा को संबोधित करते हुए संघाणी ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद देश के सहकारिता आंदोलन को नई दिशा मिली है। मंत्रालय ने सहकारिता क्षेत्र के लिए केंद्रित नीतिगत समर्थन और संस्थागत सुधारों की शुरुआत की है, जिससे सहकारी संस्थाओं के विकास को नई गति मिली है।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में मंत्रालय द्वारा लागू की गई नई मॉडल उपविधियां सहकारी संस्थाओं के लिए एक नई कार्यसंस्कृति स्थापित कर रही हैं। इन उपविधियों से संस्थाओं में सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने सभी सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारियों, निदेशकों और सदस्यों से अपील की कि वे नई उपविधियों का गंभीरता से अध्ययन करें और उनका प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित करें, ताकि उनका अधिकतम लाभ मिल सके।

संघाणी ने कहा कि केंद्र सरकार ने बीज, जैविक खेती और निर्यात के क्षेत्र में तीन नई राष्ट्रीय सहकारी समितियों का गठन किया है। इन संस्थाओं का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना तथा देश में सहकारिता तंत्र को और अधिक सशक्त बनाना है।

उन्होंने इन नई राष्ट्रीय सहकारी समितियों के उद्देश्यों और गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि ये पहल किसानों की समृद्धि बढ़ाने और सहकारिता आंदोलन के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

इफको अध्यक्ष ने यह भी कहा कि सरकार ने पारदर्शिता, दक्षता और सुगम कार्यप्रणाली को बढ़ावा देने के लिए सहकारी संस्थाओं को कंप्यूटर उपलब्ध कराए हैं। सहकारी समितियों के डिजिटलीकरण से सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा संस्थाओं में बेहतर प्रशासन और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

वार्षिक आम सभा में उपस्थित किसानों, सहकारी कार्यकर्ताओं और सदस्यों से उन्होंने सहकारिता मंत्रालय की पहलों में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा अधिक से अधिक लोगों को सहकारिता आंदोलन से जोड़ने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत के आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और सामुदायिक सुरक्षा के लिए मजबूत सहकारी संस्थाएं अत्यंत आवश्यक हैं। सामूहिक भागीदारी से ही आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त सहकारिता क्षेत्र के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

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