
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने को कहा कि सहकारिता मंत्रालय ने अपने गठन के पांच वर्षों में भारत के सहकारी आंदोलन को आधुनिक, पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-संचालित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की मजबूत नींव रखी है।
नई दिल्ली में सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अलग सहकारिता मंत्रालय के गठन से देशभर की 8.58 लाख से अधिक सहकारी संस्थाओं से जुड़े 30 करोड़ से अधिक लोगों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है।
उन्होंने पिछले पांच वर्षों को सहकारी क्षेत्र का “स्वर्णिम काल” बताते हुए कहा कि मंत्रालय ने वर्षों से लंबित चुनौतियों की पहचान कर उनके समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं और भविष्य के लिए व्यापक रोडमैप तैयार किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2047 में जब भारत आजादी की शताब्दी मनाएगा, तब सहकारिता आंदोलन विकसित भारत के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक होगा।
अपनी उपलब्धियां गिनाते हुए अमित शाह ने बताया कि देश की 8.58 लाख से अधिक सहकारी समितियों और 32 करोड़ से अधिक सदस्यों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया गया है। इससे नीति निर्माण, सुशासन और पारदर्शिता को नई मजबूती मिली है।
उन्होंने कहा कि कृषि, डेयरी, निर्यात, लॉजिस्टिक्स, मोबिलिटी, जैविक खेती और बीज उत्पादन जैसे क्षेत्रों में नौ राष्ट्रीय स्तर की नई सहकारी संस्थाओं का गठन किया गया है, जिनका उद्देश्य अगले दशक में वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धी सहकारी संस्थाएं विकसित करना है।
उन्होंने कहा कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को सशक्त बनाना मंत्रालय की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रहा है। लगभग 3,000 करोड़ रुपये की लागत से पैक्स के कंप्यूटरीकरण का कार्य किया गया, जिसके परिणामस्वरूप करीब 50,000 ई-पैक्स स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अलावा 55,000 से अधिक पैक्स अब 300 से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, जबकि 39,000 पैक्स किसान समृद्धि केंद्र और 600 से अधिक पैक्स जन औषधि केंद्र के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी संस्थाओं की भूमिका और अधिक मजबूत हुई है।
अमित शाह ने सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल बैंकिंग, ई-केवाईसी और साइबर सुरक्षा जैसे सुधारों के कारण जिला सहकारी बैंकों का कुल कारोबार 19.6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 25 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। साथ ही, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
उन्होंने कहा कि त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय बैंकिंग, डेयरी, कृषि और सहकारी प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित एवं पेशेवर मानव संसाधन तैयार करेगा, जिससे पूरे सहकारी क्षेत्र में पारदर्शिता, दक्षता और सुशासन को बढ़ावा मिलेगा।
कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि भारत बीज सहकारी समिति लिमिटेड अगले तीन वर्षों में देश की सबसे बड़ी बीज उत्पादन कंपनी बनने की दिशा में अग्रसर है। यह संस्था विभिन्न राज्यों में नई उत्पादन इकाइयों के माध्यम से किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले स्वदेशी और अधिक उत्पादन देने वाले बीज उपलब्ध कराएगी।
उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं के माध्यम से जैविक खेती, जैव उर्वरकों, गोबर प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा तथा सर्कुलर इकोनॉमी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही गांवों से लेकर वैश्विक बाजार तक किसानों और सहकारी संस्थाओं की पहुंच मजबूत करने के लिए विभिन्न पहल की जा रही हैं।
इस अवसर पर अमित शाह ने कई नई परियोजनाओं और डिजिटल पहलों का शुभारंभ एवं लोकार्पण किया। इनमें गोदामों का उद्घाटन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित बैंकिंग प्लेटफॉर्म, डेयरी उत्पादकता कार्यक्रम, टिश्यू कल्चर सुविधाएं, डिजिटल सहकारी एप्लीकेशन तथा 50,000 पैक्स को ई-पैक्स में परिवर्तित करने जैसी पहलें शामिल हैं।
समारोह के दौरान देश के बीज तंत्र को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। साथ ही सहकारिता मंत्रालय की पांच वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित एक विशेष प्रकाशन का भी विमोचन किया गया। अमित शाह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सहकारिता क्षेत्र को समावेशी ग्रामीण विकास और विकसित भारत के निर्माण का प्रमुख आधार बनाना है।



