
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 23वीं किस्त जारी किए जाने के अवसर पर देशभर की प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) ने विशेष कार्यक्रम आयोजित किए। इस दौरान किसानों, सहकारी सदस्यों और ग्रामीण हितधारकों ने विभिन्न पैक्स परिसरों में प्रधानमंत्री के संबोधन का सीधा प्रसारण देखा।
23वीं किस्त के तहत प्रधानमंत्री ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 9.44 करोड़ से अधिक किसान लाभार्थियों के बैंक खातों में 18,880 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की। इस किस्त के लाभार्थियों में 2.18 करोड़ से अधिक महिला किसान भी शामिल हैं।
कार्यक्रमों के दौरान पैक्स ने किसानों को पीएम-किसान योजना के लाभ, पात्रता मानदंड, रिकॉर्ड अद्यतन रखने तथा ई-केवाईसी पूर्ण करने के महत्व के बारे में भी जानकारी दी, ताकि उन्हें योजना का लाभ निर्बाध रूप से मिलता रहे।
वर्ष 2019 में शुरू की गई पीएम-किसान योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में प्रदान की जाती है। यह योजना दुनिया की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष आय सहायता योजनाओं में से एक मानी जाती है।
सहकारिता मंत्रालय के अनुसार, पीएम-किसान योजना और सहकारी नेटवर्क ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने में एक-दूसरे के पूरक साबित हो रहे हैं। सुधारों के तहत बहुउद्देश्यीय संस्थाओं के रूप में विकसित किए जा रहे पैक्स कृषि सेवाओं, ऋण वितरण, जागरूकता और सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के स्थानीय केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।
इस अवसर पर गांधीनगर स्थित गुजरात राज्य सहकारी विपणन संघ मुख्यालय में आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में इफको के अध्यक्ष दिलीप संघानी भी शामिल हुए। अधिकारियों का कहना है कि पीएम-किसान के माध्यम से दी जा रही प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता और सहकारी संस्थाओं द्वारा जमीनी स्तर पर किए जा रहे प्रयास किसानों की आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह पहल “सहकार से समृद्धि” के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सहकारिताओं को समावेशी ग्रामीण विकास और कृषि वृद्धि के केंद्र में स्थापित करना है।



