
सहकारी क्षेत्र में वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज (सीआरसीएस) ने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) एम्प्लॉइज को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड के परिसमापन का आदेश जारी कर दिया है। साथ ही समिति की संपत्तियों और कार्यों का प्रबंधन संभालने के लिए एक परिसमापक (लिक्विडेटर) नियुक्त किया गया है।
यह कार्रवाई बहुराज्यीय सहकारी समितियां अधिनियम, 2002 की धारा 86 के तहत की गई है। समिति के सदस्यों द्वारा परिपक्व जमा राशियों का भुगतान न किए जाने, वित्तीय कुप्रबंधन, अनधिकृत निवेश और प्रशासनिक विफलताओं से संबंधित कई शिकायतें दर्ज कराई गई थीं।
केंद्रीय रजिस्ट्रार द्वारा जारी आदेश दिल्ली उच्च न्यायालय के 19 मई 2026 के निर्देश के अनुपालन में जारी किया गया है। न्यायालय ने केंद्रीय रजिस्ट्रार को 15 जून 2026 तक समिति का परिसमापन कर परिसमापक नियुक्त करने का निर्देश दिया था।
जांच और निरीक्षण रिपोर्टों में समिति द्वारा सहकारी कानूनों के कई प्रावधानों के उल्लंघन का खुलासा हुआ। पश्चिम बंगाल के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार की रिपोर्ट में अवैध सदस्यता, अनधिकृत और जोखिमपूर्ण निवेश, संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन तथा चुनाव संबंधी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
अधिकारियों के बार-बार निर्देशों और सहकारी लोकपाल द्वारा जमाकर्ताओं को ब्याज सहित भुगतान करने के आदेश के बावजूद समिति परिपक्व जमा राशियों का भुगतान करने में विफल रही। बाद की जांच में गंभीर तरलता संकट और प्रशासनिक खामियां सामने आईं।
डी.के. छाजेर एंड कंपनी द्वारा किए गए फॉरेंसिक ऑडिट में व्यापक वित्तीय और अनुपालन संबंधी अनियमितताओं का खुलासा हुआ। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार समिति का शुद्ध घाटा लगभग 364.84 करोड़ रुपये आंका गया है। रिपोर्ट में लगातार प्रशासनिक विफलताओं और भारी वित्तीय नुकसान की ओर भी संकेत किया गया है।
जांच में अनधिकृत योजनाओं के संचालन, अधिनियम के उल्लंघन, निर्धारित सीमा से अधिक उधारी, सट्टा निवेश तथा पूंजी से लाभांश वितरण जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। रिपोर्ट में समिति के पूर्व अध्यक्ष ज्योतिर्मय चक्रवर्ती के लंबे समय तक संगठन पर प्रभावी नियंत्रण का भी उल्लेख किया गया है।
केंद्रीय रजिस्ट्रार आनंद कुमार झा ने अधिनियम की धारा 89 के तहत पश्चिम बंगाल के सहकारिता निदेशालय, कोलकाता रेंज के सहकारिता विकास अधिकारी को समिति का परिसमापक नियुक्त किया है।
परिसमापक को समिति की सभी संपत्तियों, बैंक खातों, चल-अचल संपत्तियों, निवेशों, सावधि जमाओं और म्यूचुअल फंडों को अपने कब्जे में लेने तथा परिसमापन प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है। यह प्रक्रिया छह माह के भीतर पूरी की जानी है और इसकी प्रगति रिपोर्ट प्रत्येक तिमाही में केंद्रीय रजिस्ट्रार को सौंपी जाएगी।



