
कर्नाटक राज्य सहकारी शहरी बैंक महासंघ लिमिटेड और येन्नेगेरे आर. वेंकटरामय्या ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक्स गवर्नेंस संशोधन निर्देश, 2026 तथा बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
बेंगलुरु पीठ के समक्ष दायर रिट याचिका में 25 मई 2026 को जारी आरबीआई के निर्देशों को निरस्त करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ये निर्देश आरबीआई के अधिकार क्षेत्र से परे हैं, संविधान के विपरीत हैं तथा संविधान के अनुच्छेद 14 और 19(1)(c) के तहत प्राप्त उनके अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
याचिका में विशेष रूप से बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 10ए(2ए)(i) में किए गए संशोधन को चुनौती दी गई है, जिसके तहत शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के निदेशकों के लिए कार्यकाल सीमा और ‘कूलिंग-ऑफ’ अवधि का प्रावधान किया गया है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि सहकारी समितियां संविधान की राज्य सूची (सूची-2) की प्रविष्टि 32 के अंतर्गत राज्यों के विधायी अधिकार क्षेत्र में आती हैं। ऐसे में संसद, कर्नाटक सहकारी समितियां अधिनियम, 1959 के तहत पंजीकृत सहकारी बैंकों के निदेशकों पर इस प्रकार के प्रतिबंध नहीं लगा सकती।
महासंघ ने न्यायालय से यह भी अनुरोध किया है कि विवादित प्रावधानों के आधार पर सदस्य शहरी सहकारी बैंकों के निदेशकों के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी कार्रवाई को कानूनन अवैध घोषित किया जाए। साथ ही, याचिका के अंतिम निपटारे तक आरबीआई के निर्देशों के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाने की मांग भी की गई है।
मामला 12 जून को न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज के समक्ष पहली बार सुनवाई के लिए आया था। इसकी अगली सुनवाई 7 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक ने इस मामले में कैविएट भी दायर की है, ताकि किसी भी अंतरिम आदेश से पहले उसका पक्ष सुना जा सके।
महासंघ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ने बताया कि याचिका को न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है और अगली सुनवाई 7 जुलाई को होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि महासंघ को न्यायालय से राहत मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि आरबीआई पहले ही मामले में कैविएट दाखिल कर चुका है।
गौरतलब है कि आरबीआई द्वारा गवर्नेंस संशोधन निर्देश, 2026 जारी किए जाने के तुरंत बाद कर्नाटक राज्य सहकारी शहरी बैंक महासंघ ने नए नियमों के क्रियान्वयन को लेकर केंद्रीय बैंक से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा था। महासंघ ने अध्यक्षों और पेशेवर निदेशकों पर 10 वर्ष की कार्यकाल सीमा की लागूता, बोर्ड में विभिन्न पदों पर दी गई सेवाओं की गणना तथा अध्यक्षों के लिए आयु सीमा जैसे मुद्दों पर मार्गदर्शन मांगा था।



