
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) का सकल एनपीए 31 मार्च 2026 तक घटकर 21,769 करोड़ रुपये रह गया है, जो पिछले छह वर्षों का सबसे निचला स्तर है।
उन्होंने कहा कि शहरी सहकारी बैंकों का सकल एनपीए मार्च 2021 में 37,993 करोड़ रुपये था, जो लगातार घटते हुए मार्च 2026 में 21,769 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) का सकल एनपीए भी मार्च 2021 के 6.17 लाख करोड़ रुपये से घटकर मार्च 2026 में 2.46 लाख करोड़ रुपये रह गया। इसी अवधि में निजी क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए 2.02 लाख करोड़ रुपये से घटकर 1.26 लाख करोड़ रुपये हो गया।
पंकज चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा उठाए गए व्यापक कदमों के कारण अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सकल एनपीए अनुपात पिछले आठ वर्षों से लगातार घट रहा है। यह मार्च 2024 में 2.75 प्रतिशत था, जो मार्च 2026 तक घटकर 1.73 प्रतिशत हो गया।
हालांकि, सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में स्थिति मिश्रित रही। नाबार्ड के आंकड़ों के अनुसार, राज्य सहकारी बैंकों का सकल एनपीए मार्च 2021 के 14,113 करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2026 में 16,422 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) का सकल एनपीए मार्च 2026 में 35,483 करोड़ रुपये रहा, जबकि मार्च 2021 में यह 34,610 करोड़ रुपये था।
उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्रालय ने संसद को बताया कि वह बहुराज्यीय सहकारी समितियों (एमएससीएस) के एनपीए से संबंधित आंकड़े नहीं रखता है।
पंकज चौधरी ने बताया कि सरकार और आरबीआई ने ऋण वसूली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी), सरफेसी अधिनियम, अर्ली वार्निंग सिस्टम, स्ट्रेस्ड एसेट मैनेजमेंट वर्टिकल्स तथा आरबीआई के प्रूडेंशियल फ्रेमवर्क फॉर रिजॉल्यूशन ऑफ स्ट्रेस्ड एसेट्स जैसे उपाय लागू किए हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि बहुराज्यीय सहकारी समिति (संशोधन) अधिनियम और नियम, 2023 के तहत पारदर्शिता बढ़ाने तथा अनियमितताओं का समय रहते पता लगाने के लिए सहकारी लोकपाल (कोऑपरेटिव ओम्बुड्समैन), सूचना अधिकारियों और बड़ी बहुराज्यीय सहकारी समितियों के लिए समवर्ती लेखा परीक्षा (कन्करेंट ऑडिट) जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।



