ताजा खबरें

मॉडल एचआर नीति: पैक्स में स्टाफिंग, कारोबार के आकार से होगी तय

पैक्स के कम्प्यूटरीकरण के बाद सहकारिता मंत्रालय ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), बड़े क्षेत्र बहुउद्देशीय समितियों (लैम्पस) और किसान सेवा समितियों (एफएसएस) के लिए मसौदा मॉडल मानव संसाधन नीति प्रस्तावित की है।

मसौदा नीति में पैक्स का वर्गीकरण पिछले तीन वर्षों के औसत कुल ऋण एवं गैर-ऋण कारोबार के आधार पर ए+ से एफ तक सात श्रेणियों में करने का प्रस्ताव है। प्रत्येक श्रेणी के लिए न्यूनतम स्टाफिंग मानदंड तय किए गए हैं।

10 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वाली ए+ श्रेणी की पैक्स में न्यूनतम सात कर्मचारी रखने का प्रस्ताव है। इनमें सचिव, प्रबंधक, लेखाकार/सहायक कार्यकारी, दो विशेषज्ञ और दो क्लर्क/डेटा एंट्री ऑपरेटर शामिल होंगे। 5-10 करोड़ रुपये कारोबार वाली समितियों में छह, 3-5 करोड़ में पांच, 1-3 करोड़ में चार और 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक कारोबार वाली पैक्स में तीन कर्मचारियों का प्रावधान है।

25-50 लाख रुपये तथा 25 लाख रुपये तक कारोबार वाली पैक्स में न्यूनतम दो कर्मचारी रखने का प्रस्ताव है। 25 लाख रुपये तक कारोबार वाली समितियों में निर्धारित शर्तों के तहत साझा सचिव की व्यवस्था हो सकती है, लेकिन ‘मेकर-चेकर’ सिद्धांत के तहत कुल स्टाफ दो से कम नहीं होगा।

मसौदा नीति कारोबार बढ़ने के साथ अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति की अनुमति देती है। इसके लिए पैक्स को तीन वर्षों के भीतर वेतन और प्रशासनिक खर्च अपनी आय से पूरा करने की क्षमता दर्शाने वाला वित्तीय रोडमैप तैयार करना होगा। निर्धारित मानदंड से अधिक भर्ती के लिए जिला स्तरीय पैक्स समिति की मंजूरी आवश्यक होगी।

भर्ती को योग्यता आधारित बनाने के लिए लिखित परीक्षा और साक्षात्कार का प्रस्ताव है। मान्यता प्राप्त सहकारी क्षेत्र की योग्यताओं को अतिरिक्त वेटेज देने की बात कही गई है। भर्ती स्वतंत्र एजेंसियों या राज्य स्तरीय भर्ती निकायों के माध्यम से भी की जा सकेगी।

वेतन के लिए संरचित वेतनमान, निश्चित समेकित पारिश्रमिक और प्रदर्शन आधारित परिवर्ती वेतन के तीन विकल्प प्रस्तावित किए गए हैं। राज्य अपनी आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त मॉडल अपना सकेंगे।

जिला स्तरीय पैक्स समिति को भर्ती, प्रशिक्षण, प्रदर्शन मूल्यांकन, सेवा रिकॉर्ड, स्थानांतरण, अनुशासनात्मक मामलों, ऑडिट अनुपालन और बिजनेस डेवलपमेंट प्लान की निगरानी की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव है। राज्य स्तरीय पैक्स समितियां राज्य स्तर पर निगरानी करेंगी।

वित्तीय रूप से कमजोर लेकिन व्यवहार्य पैक्स के लिए जिला स्तरीय पैक्स सहायता कोष बनाने का प्रस्ताव भी है। इसके तहत बिजनेस डेवलपमेंट प्लान और वित्तीय स्थिरता से जुड़े लक्ष्यों के आधार पर ब्याज-मुक्त या आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जा सकेगा।

नीति में प्रदर्शन मूल्यांकन, प्रोत्साहन, करियर प्रगति, कर्मचारी कल्याण, सेवानिवृत्ति लाभ, प्रशिक्षण और ई-पैक्स प्लेटफॉर्म पर डिजिटल सेवा रिकॉर्ड का भी प्रावधान है।

मसौदा ढांचे का लक्ष्य पैक्स में अनियोजित भर्ती को कम करना, कौशल की कमी दूर करना और जवाबदेही बढ़ाना है, ताकि जमीनी स्तर की सहकारी संस्थाओं में पेशेवर, डिजिटल रूप से सक्षम और वित्तीय रूप से टिकाऊ कार्यबल तैयार किया जा सके।

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close