
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की खंडपीठ आरसीएस द्वारा 31 जुलाई 2026 को दिल्ली सहकारी समितियां अधिनियम, 2003 की धारा 35(5) के तहत जारी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस आदेश के जरिए सोसायटी में 90 दिनों अथवा चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक, जो भी पहले हो, के लिए प्रशासक नियुक्त किया गया था।
खंडपीठ ने कहा कि सोसायटी के चुनाव पहले ही 2 अगस्त 2026 के लिए निर्धारित किए जा चुके थे। इसके बावजूद आरसीएस ने चुनाव की निर्धारित तिथि की जानकारी होने के बावजूद 31 जुलाई को यह कहते हुए प्रशासक नियुक्त कर दिया कि मौजूदा प्रबंध समिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका है।
अदालत ने आरसीएस के इस फैसले के समय पर विशेष आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि इससे पहले भी इसी मामले में प्रशासक की नियुक्ति से संबंधित विवाद उसके समक्ष लंबित था और पूर्व में हाईकोर्ट ने प्रशासक की नियुक्ति के आदेश पर रोक लगाते हुए नए चुनाव की प्रक्रिया को कानून के अनुसार जारी रखने का निर्देश दिया था।
इन परिस्थितियों में अदालत ने कहा कि प्रबंध समिति को हटाने और प्रशासक नियुक्त करने का आरसीएस का निर्णय “स्पष्ट अतिक्रमण” है। खंडपीठ ने कहा कि आरसीएस को इस संबंध में पहले से लंबित रिट याचिका में अदालत की अनुमति लेनी चाहिए थी या फिर चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक पर्यवेक्षक नियुक्त किया जा सकता था।
अदालत ने यह भी कहा कि अधिनियम के तहत प्रशासक को कई अधिकार प्राप्त होते हैं और ऐसे में निर्धारित चुनाव से केवल दो दिन पहले किसी अधिकारी को ये अधिकार सौंपे जाने पर सवाल उठता है।
खंडपीठ ने यह भी टिप्पणी की कि आरसीएस विभिन्न मामलों में प्रबंध समितियों को हटाकर प्रशासक नियुक्त करता रहा है और कुछ मामलों में यह कार्रवाई “ऊपरी तौर पर उचित प्रतीत होने वाले आधारों” पर भी की गई है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि कानून के अनुसार आवश्यकता होने पर आरसीएस को प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार है। लेकिन आनंद लोक सोसायटी के मामले में बार-बार प्रशासक की नियुक्ति किए जाने से “संदेह पैदा होते हैं।”
अदालत ने नोट किया कि इस बीच सोसायटी के चुनाव संपन्न हो चुके हैं और नई प्रबंध समिति का चुनाव हो चुका है। अदालत ने निर्देश दिया कि नवनिर्वाचित प्रबंध समिति कानून के अनुसार सोसायटी के कार्यों का संचालन करेगी और असफल सदस्यों या चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों द्वारा उसके कामकाज में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने 31 जुलाई का आदेश पारित करने वाले संबंधित आरसीएस अधिकारी को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। साथ ही, अदालत ने रिटर्निंग ऑफिसर को चुनाव से संबंधित पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और उसे सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया।
मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित की गई है। इस दौरान अदालत प्रशासक की नियुक्ति और सोसायटी के प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर आगे विचार करेगी।



