
नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया (एनसीयूआई) के पदाधिकारियों के चुनाव की तारीखों की घोषणा कभी भी हो सकती है। इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े सहकारी संगठन सहकार भारती ने एनसीयूआई के शीर्ष पदों पर अपनी दावेदारी ठोकने का फैसला किया है। संगठन अब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है।
सूत्रों के अनुसार, सहकार भारती पहले एनसीयूआई के पदाधिकारियों के चुनाव में आम सहमति के उम्मीदवार के साथ जाने के पक्ष में थी। हालांकि, एनसीयूआई गवर्निंग काउंसिल के चुनाव परिणामों के बाद संगठन ने अपना रुख बदल दिया। गवर्निंग काउंसिल की 21 में से 17 सीटों पर सहकार भारती से जुड़े उम्मीदवारों की जीत के बाद संगठन ने शीर्ष पदों पर भी अपना दावा पेश करने का फैसला किया है।
भारतीय सहकारिता को मिली जानकारी के मुताबिक, सहकार भारती ने एनसीयूआई के शीर्ष पदों के लिए अपने पसंदीदा नामों पर आंतरिक रूप से फैसला कर लिया है। सहकार भारती के वर्तमान संरक्षक डी.एन. ठाकुर को अध्यक्ष पद के लिए, जबकि कर्नाटक के पूर्व सांसद अन्नासाहेब जोल्ले को उपाध्यक्ष पद के लिए संगठन की पसंद माना जा रहा है।
संगठन के रुख में बदलाव के पीछे गवर्निंग काउंसिल में सहकार भारती समर्थित सदस्यों की मजबूत मौजूदगी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। सूत्र के मुताबिक, नई गवर्निंग काउंसिल में सहकार भारती समर्थित सदस्यों के प्रभाव को देखते हुए संगठन चाहता है कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी उसके विचारों के अनुरूप नेतृत्व हो।
सूत्र के अनुसार, सहकार भारती का मानना है कि यदि अध्यक्ष उसके संगठन से बाहर का होता है और उसके किसी फैसले से गवर्निंग काउंसिल के बहुमत सदस्य सहमत नहीं होते हैं, तो एनसीयूआई में नीतिगत और प्रशासनिक मुद्दों पर टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी वजह से सहकार भारती चाहती है कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष जैसे शीर्ष पदों पर उसके समर्थित उम्मीदवार हों, ताकि गवर्निंग काउंसिल और पदाधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल बना रहे।
एनसीयूआई पदाधिकारियों के चुनाव का रास्ता सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद साफ हुआ है। 14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने एनसीयूआई गवर्निंग काउंसिल चुनाव से संबंधित लंबित विशेष अनुमति याचिकाओं को निष्प्रभावी बताते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि समय बीतने के कारण याचिकाएं निष्प्रभावी हो चुकी हैं, हालांकि संबंधित कानूनी सवालों को भविष्य के उपयुक्त मामले में विचार के लिए खुला रखा गया।
मामला सुप्रीम कोर्ट के 4 मई के अंतरिम आदेश से जुड़ा था, जिसमें नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (एनसीईएल), नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एनसीओएल) और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) को एनसीयूआई चुनाव में हिस्सा लेने और मतदान करने की अनुमति दी गई थी। हालांकि, इन तीनों मतों को सीलबंद लिफाफे में रखने और चुनाव परिणाम को आगे के आदेशों के अधीन रखने का निर्देश दिया गया था।
इसके बाद केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के अधीन सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण (सीईए) ने 31 जुलाई को एनसीयूआई गवर्निंग काउंसिल के चुनाव परिणामों से संबंधित सिफारिशों को मंजूरी दे दी। एनसीयूआई के चुनाव अपडेट में भी अब ग्रुप-II को छोड़कर सभी निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं।
ग्रुप-II में राष्ट्रीय सहकारी महासंघों के निर्वाचन क्षेत्र की पांच सीटें अभी चुनाव प्रक्रिया का अंतिम लंबित हिस्सा हैं। सुप्रीम कोर्ट से कानूनी अड़चन दूर होने के बाद अब एनसीयूआई के पदाधिकारियों के चुनाव का रास्ता लगभग साफ हो गया है।
ऐसे में सहकार भारती द्वारा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए अपने उम्मीदवार आगे करने का फैसला आगामी चुनाव को खासा महत्वपूर्ण बना देता है। गवर्निंग काउंसिल में संगठन के मजबूत प्रतिनिधित्व के बीच अब एनसीयूआई के शीर्ष पदों की चुनावी तस्वीर पर सहकारी क्षेत्र की नजरें टिकी हैं।



