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दाल-मक्का उत्पादन को बढ़ावा देने में नेफेड-एनसीसीएफ के प्रयास सराहनीय

सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश में दालों और मक्का के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। इस पहल में नेफेड और एनसीसीएफ किसानों को सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराने और सहकारी आधारित खरीद व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

इस पहल का उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करने के लिए किसानों को अरहर, उड़द और मसूर का उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है। वहीं, इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की जरूरतों को पूरा करने के लिए मक्का की खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

सहकारिता मंत्रालय के अनुसार, एनसीसीएफ के ई-सम्युक्ति पोर्टल पर 44.09 लाख से अधिक किसान, जबकि नेफेड के ई-समृद्धि पोर्टल पर 15.84 लाख से अधिक किसान पंजीकरण करा चुके हैं। बड़ी संख्या में किसानों का पंजीकरण इन दोनों राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्थाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म और खरीद नेटवर्क के माध्यम से नेफेड और एनसीसीएफ ऐसा तंत्र विकसित कर रहे हैं, जिसके तहत पूर्व-पंजीकृत किसानों को उनकी उपज की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सुनिश्चित खरीद की सुविधा मिल सके। इससे किसानों को फसल बाजार में लाने से पहले ही बाजार और मूल्य को लेकर अधिक भरोसा मिलता है।

हालांकि, यह व्यवस्था किसानों को केवल एमएसपी पर बिक्री तक सीमित नहीं करती। मंत्रालय के अनुसार, यदि खुले बाजार में प्रचलित कीमत एमएसपी से अधिक है, तो किसान अपनी उपज खुले बाजार में बेचने के लिए स्वतंत्र हैं। इस तरह किसान सुनिश्चित खरीद की सुरक्षा के साथ बेहतर बाजार भाव का लाभ भी उठा सकते हैं।

कृषि विपणन और खरीद के क्षेत्र में नेफेड की महत्वपूर्ण भूमिका है। उसका व्यापक सहकारी नेटवर्क किसानों को संगठित करने, उपज एकत्र करने और आवश्यक कृषि जिंसों के विपणन के लिए संस्थागत माध्यम उपलब्ध कराता है। वहीं, एनसीसीएफ किसान पंजीकरण और बाजार से जोड़ने की पहलों के माध्यम से खरीद एवं उपभोक्ता बाजार व्यवस्था को मजबूत कर रहा है।

दालों पर विशेष जोर भारत की आयात निर्भरता कम करने के रणनीतिक प्रयासों का हिस्सा है। अरहर, उड़द और मसूर की सुनिश्चित खरीद से किसानों को इन फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए अधिक भरोसा मिलने की उम्मीद है।

मक्का को भी प्राथमिकता वाली फसल के रूप में शामिल किया गया है, क्योंकि यह इथेनॉल उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है। मक्का उत्पादन को बढ़ावा देने से किसानों की आय, घरेलू कृषि उत्पादन और सरकार के इथेनॉल मिश्रण लक्ष्यों को एक साथ समर्थन मिल सकता है।

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