
सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसायटी (सीआरसीएस) कार्यालय ने वित्तीय अनियमितताओं, कुप्रबंधन, वैधानिक प्रावधानों के कथित उल्लंघन और जमाकर्ताओं की राशि वापस नहीं करने के आरोपों के आधार पर महाराष्ट्र और केरल की दो बहु-राज्यीय सहकारी समितियों के खिलाफ वाइंडिंग-अप (परिसमापन) की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
बहु-राज्यीय सहकारी समिति अधिनियम, 2002 की धारा 86 के तहत जारी अलग-अलग नोटिसों में केंद्रीय रजिस्ट्रार शिव पाल सिंह ने दोनों समितियों तथा अन्य संबंधित पक्षों को 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। नोटिस में कहा गया है कि निर्धारित अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर औपचारिक परिसमापन की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
महाराष्ट्र के साई सेवा मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड, कष्टी के मामले में निरीक्षण तथा लगातार तीन वर्षों के वैधानिक ऑडिट के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई है। यह कार्रवाई महाराष्ट्र के सहकारिता आयुक्त एवं सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार द्वारा किए गए निरीक्षण तथा वित्त वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 की ऑडिट रिपोर्टों के आधार पर की गई है।
सीआरसीएस के नोटिस के अनुसार, समिति चुनाव संबंधी अभिलेख, सदस्य रजिस्टर और निदेशक मंडल की बैठकों की कार्यवाही जैसे आवश्यक वैधानिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने में विफल रही। इसके अलावा कर्मचारियों की नियुक्ति, वैधानिक ऑडिट, कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) अनुपालन, उधारी सीमा, असुरक्षित ऋण वितरण और वैधानिक निवेश संबंधी प्रावधानों के कथित उल्लंघन का भी उल्लेख किया गया है।
ऑडिट रिपोर्टों में यह भी आरोप लगाया गया है कि समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों और उनके रिश्तेदारों को दिए गए ऋणों के माध्यम से करीब 78 करोड़ रुपये का वित्तीय दुरुपयोग हुआ।
रिपोर्ट में महाप्रबंधक, अध्यक्ष, निदेशकों और कैशियर से जुड़े परिवारों एवं संस्थाओं को बड़ी राशि के ऋण दिए जाने का उल्लेख है। इसके अलावा फर्जी ऋण खाते, बिना दस्तावेजों के भूमि विकास ऋण, प्रॉक्सी उधारकर्ता, संबंधित संस्था के माध्यम से धन का लेनदेन, हितों का टकराव, कमजोर आंतरिक नियंत्रण और संभावित वित्तीय अनियमितताओं की ओर भी संकेत किया गया है। ऑडिटरों ने लगातार तीन वर्षों तक समिति को ‘डी (बैड)’ श्रेणी में रखने की सिफारिश करते हुए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की है।
सीआरसीएस ने समिति को 1 जून 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी कर दस दिनों के भीतर जवाब मांगा था, लेकिन नोटिस के अनुसार समिति की ओर से कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ।
दूसरे मामले में, केरल की सदर्न ग्रीन फार्मिंग एंड मार्केटिंग मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड, कोझिकोड के खिलाफ भी जमाकर्ताओं की शिकायतों के आधार पर परिसमापन की प्रक्रिया शुरू की गई है। नोटिस के अनुसार, सहकारी लोकपाल ने जुलाई 2025 में 13 शिकायतकर्ताओं को ब्याज सहित जमा राशि लौटाने का निर्देश दिया था, लेकिन इसका पालन नहीं किया गया। सीआरसीएस द्वारा बुलाई गई तीन सुनवाई में भी समिति का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ।
समिति ने वित्त वर्ष 2024-25 की अनिवार्य वार्षिक रिटर्न भी दाखिल नहीं की। इसके अलावा, कोट्टायम के उप पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि समिति ने जनता से जमा राशि जुटाने के बाद कामकाज बंद कर दिया और निवेशकों का पैसा वापस नहीं किया।



