
महाराष्ट्र स्थित एमएससी बैंक ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वित्त वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार के विभागों और सरकारी संस्थाओं के बैंकिंग कामकाज तथा उनकी अतिरिक्त धनराशि के निवेश के लिए अधिकृत बैंकों की सूची में एमएससी बैंक को शामिल किया गया है। वह इस सूची में शामिल होने वाला एकमात्र सहकारी बैंक है।
महाराष्ट्र वित्त विभाग ने 20 अगस्त 2026 को एक आदेश जारी कर सरकारी विभागों और संस्थाओं के बैंकिंग कामकाज तथा अतिरिक्त धनराशि के निवेश के लिए बैंकों की पात्रता तय की। इसके लिए बैंकों की वित्तीय स्थिति और नियामकीय अनुपालन से जुड़े कई मानदंड निर्धारित किए गए हैं।
एमएससी बैंक के लिए प्रमुख शर्तों में कम से कम 4,000 करोड़ रुपये की शुद्ध संपत्ति, लगातार पांच वर्षों तक शुद्ध लाभ, ‘ए’ श्रेणी की लेखापरीक्षा रेटिंग, 12 प्रतिशत से अधिक पूंजी पर्याप्तता अनुपात (सीआरएआर) और भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से किसी तरह का वित्तीय प्रतिबंध नहीं होना शामिल है। बैंक को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के दायरे में भी नहीं होना चाहिए।
बैंक की वित्त वर्ष 2025-26 की बैलेंस शीट के अनुसार उसकी शुद्ध संपत्ति 5,746.61 करोड़ रुपये रही, जो निर्धारित 4,000 करोड़ रुपये की सीमा से काफी अधिक है।
एमएससी बैंक के प्रशासनिक बोर्ड के अध्यक्ष विद्याधर अनास्कर ने कहा कि सरकार का यह फैसला बैंक की मजबूत वित्तीय स्थिति, बेहतर प्रशासन और लगातार अच्छे प्रदर्शन में उसके विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सरकारी बैंकिंग के लिए एमएससी बैंक का चयन राज्य के शीर्ष सहकारी बैंक के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाता है और इससे सरकारी बैंकिंग क्षेत्र में बैंक की भूमिका और मजबूत होगी।
सरकार की सूची में एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, इंडसइंड बैंक, यस बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, फेडरल बैंक, बंधन बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और आरबीएल बैंक सहित कई प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंक शामिल हैं। एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक को प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण घरेलू बैंकों की श्रेणी में रखा गया है। इन सभी बैंकों के बीच एमएससी बैंक सूची में शामिल होने वाला एकमात्र सहकारी बैंक है।
31 मार्च 2026 तक एमएससी बैंक का सीआरएआर 18.50 प्रतिशत, सकल एनपीए 8.44 प्रतिशत और शुद्ध एनपीए 1.64 प्रतिशत रहा। बैंक का परिसंपत्तियों पर प्रतिफल 1.45 प्रतिशत और प्रावधान कवरेज अनुपात 81.91 प्रतिशत था। बैंक की प्रबंधन लागत 0.40 प्रतिशत रही, जबकि प्रति कर्मचारी कारोबार लगभग 68 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
आदेश के तहत सरकारी बैंकिंग के लिए पात्र बैंकों को निर्धारित मानदंडों का लगातार पालन करना होगा। साथ ही, सरकारी विभागों, निगमों, स्वायत्त निकायों और अन्य सरकारी संस्थाओं के खातों में जमा राशि तथा किए गए निवेश का विवरण भी नियमित रूप से उपलब्ध कराना होगा।



