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सहकारिता क्षेत्र में बदलाव के लिए सरकार ने शुरू कीं 152 पहल: शाह

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में जानकारी दी कि जुलाई 2021 में सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद से ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करने के लिए अब तक 152 प्रमुख पहलें लागू की गई हैं। इन पहलों के परिणामस्वरूप फरवरी 2023 से 15 जुलाई 2026 तक देशभर में 38,138 नई प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (पैक्स), डेयरी एवं मत्स्य सहकारी समितियों का गठन किया गया है।

लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में शाह ने बताया कि सरकार ने सहकारिता क्षेत्र में कानूनी सुधार, डिजिटलीकरण, बुनियादी ढांचा विकास, सहकारी बैंकिंग, कर सुधार, क्षमता निर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) आधारित प्रशासन, सहकारी चीनी मिलों को सहायता तथा नई राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं की स्थापना सहित व्यापक सुधार लागू किए हैं।

उन्होंने बताया कि इसी अवधि में 21,292 डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों को भी सुदृढ़ किया गया है। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में देश की प्रत्येक पंचायत एवं गांव में बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (पैक्स), डेयरी तथा मत्स्य सहकारी समितियां स्थापित करना है। इस अभियान में राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी), राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) तथा राज्य सरकारें सहयोग कर रही हैं।

डिजिटलीकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। शाह ने बताया कि 63,707 पैक्स को एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) सॉफ्टवेयर से जोड़ा जा चुका है, जिनमें से 54,707 ई-पैक्स घोषित किए गए हैं। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक 51.58 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए जा चुके हैं। इसके अलावा 55,514 पैक्स कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के रूप में कार्य कर रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में 300 से अधिक नागरिक सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

विश्व की सबसे बड़ी सहकारी अनाज भंडारण योजना के तहत अब तक 302 सहकारी गोदाम (1.71 लाख मीट्रिक टन क्षमता) बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि 505 पैक्स में निर्माण कार्य जारी है। इसके अतिरिक्त 680 सहकारी गोदामों (10.86 लाख मीट्रिक टन क्षमता) के लिए भंडारण (हायरिंग) की गारंटी भी प्रदान की गई है।

सहकारी बैंकों के लिए किए गए प्रमुख सुधारों का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि नई शाखाएं खोलने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, आवास ऋण की सीमा बढ़ाई गई है, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के मानदंडों में ढील दी गई है तथा स्वर्ण ऋण (गोल्ड लोन) पर लागू मौद्रिक सीमा समाप्त कर दी गई है। इसके अलावा ग्रामीण सहकारी बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एकीकृत बैंकिंग लोकपाल योजना के दायरे में लाया गया है। साथ ही राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त एवं विकास निगम (एनयूसीएफडीसी) और ‘सहकार सारथी’ जैसी तकनीकी पहलें भी शुरू की गई हैं।

कर सुधारों के तहत सहकारी समितियों के लिए सरचार्ज और न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) में कमी, नकद लेनदेन की सीमा में वृद्धि तथा विभिन्न कर लाभ प्रदान किए गए हैं। सहकारी चीनी मिलों को आयकर राहत के अलावा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के माध्यम से 10,005 करोड़ रुपये के वित्तीय सहायता कार्यक्रम का लाभ भी दिया गया है।

मंत्री ने नई राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) ने 15 फसलों के लिए 6.07 लाख क्विंटल से अधिक गुणवत्तापूर्ण बीज का उत्पादन किया है। वहीं राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) ने 38 देशों को 15.40 लाख मीट्रिक टन कृषि उत्पादों का निर्यात किया, जिसका कुल मूल्य 6,341 करोड़ रुपये रहा।

हालांकि, सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि सहकारी संस्थाओं के रोजगार सृजन, ग्रामीण विकास और किसानों की आय में योगदान का आकलन करने के लिए अब तक कोई विशेष अध्ययन नहीं कराया गया है। सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 का उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था में सहकारिता क्षेत्र के योगदान को तीन गुना करना है।

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