
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति (एनसीपी) 2025 का उद्देश्य अगले दस वर्षों में 50 करोड़ लोगों को सहकारिता आंदोलन से जोड़ना तथा देश की अर्थव्यवस्था में सहकारिता क्षेत्र के योगदान को तीन गुना करना है।
उन्होंने बताया कि यह नीति सहकारिता क्षेत्र में व्यापक सुधारों के माध्यम से समावेशी और सतत आर्थिक विकास को गति देने के लिए तैयार की गई है।
लोकसभा में एक लिखित उत्तर में अमित शाह ने कहा कि 24 जुलाई 2025 को जारी की गई राष्ट्रीय सहकारिता नीति अगले दस वर्षों के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करती है। इसका उद्देश्य सहकारिता क्षेत्र को अधिक सशक्त, आधुनिक और प्रभावी बनाकर देश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास का प्रमुख आधार बनाना है।
उन्होंने बताया कि यह नीति छह रणनीतिक स्तंभों, 16 प्रमुख उद्देश्यों और 83 सिफारिशों पर आधारित है। इसके तहत सहकारी संस्थाओं के आधुनिकीकरण, सुशासन को मजबूत करने, सदस्यता का विस्तार करने तथा कृषि, ग्रामीण विकास, सहकारी बैंकिंग, डेयरी, मत्स्य पालन और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में उनकी भूमिका को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया है।
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति के लिए कोई अलग बजटीय प्रावधान नहीं किया गया है। यह नीति केंद्र सरकार के मंत्रालयों, राज्य सरकारों और सहकारी संस्थाओं के लिए एक मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में कार्य करेगी, ताकि वर्तमान योजनाओं और भविष्य की पहलों को साझा राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप लागू किया जा सके।
उन्होंने बताया कि 15 फरवरी 2023 को जमीनी स्तर पर सहकारी नेटवर्क को मजबूत करने की राष्ट्रीय योजना को मंजूरी मिलने के बाद उल्लेखनीय प्रगति हुई है। देशभर में अब तक 38,138 नई प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (पैक्स), लार्ज एरिया मल्टी-पर्पज सोसायटी (लैम्प्स), डेयरी सहकारी समितियां और मत्स्य सहकारी समितियां पंजीकृत की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त 21,292 मौजूदा डेयरी एवं मत्स्य प्राथमिक सहकारी समितियों को उनकी कार्यक्षमता और सेवा वितरण बेहतर बनाने के लिए सुदृढ़ किया गया है।
श्वेत क्रांति 2.0 का उल्लेख करते हुए अमित शाह ने बताया कि इस पहल के तहत 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 25,282 नई डेयरी सहकारी समितियों का पंजीकरण किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सहकारी मॉडल के माध्यम से दूध खरीद बढ़ाना, ग्रामीण रोजगार का सृजन करना, किसानों की आय में वृद्धि करना तथा डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति को राष्ट्रीय सहकारी संघों, राज्य सरकारों, सहकारिता विशेषज्ञों और क्षेत्र के अन्य हितधारकों से व्यापक परामर्श के बाद तैयार किया गया है। नीति का उद्देश्य ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करते हुए कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, निर्यात, भंडारण, डिजिटल सेवाओं और उभरते क्षेत्रों में सहकारी संस्थाओं की भूमिका का विस्तार करना है।



