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सीईएफ भुगतान को लेकर सीआरसीएस का 790 कोऑप्स को नोटिस

सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसायटीज (सीआरसीएस) कार्यालय ने 790 मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटियों (एमएससीएस) को नोटिस जारी कर उनसे कोऑपरेटिव एजुकेशन फंड (सीईएफ) में अनिवार्य अंशदान वास्तव में जमा किए जाने के संबंध में जानकारी और प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा है।

यह कार्रवाई उन विसंगतियों के सामने आने के बाद की गई है, जिनमें कई संस्थाओं ने अपनी वार्षिक रिटर्न में सीईएफ में अंशदान जमा करने का दावा किया था, जबकि सहकारिता मंत्रालय के उपलब्ध अभिलेखों और बैंक रिकॉर्ड में कई मामलों में इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।

गुरुवार को जारी तीन अलग-अलग पत्रों में सीआरसीएस ने संबंधित मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटियों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) और प्रबंध निदेशकों (एमडी) को वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के लिए सीईएफ में किए गए अंशदान का सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं।

यह अभियान कुल 790 मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटियों को कवर करता है, जिनमें वित्तीय वर्ष 2022-23 की 191, वर्ष 2023-24 की 151 तथा वर्ष 2024-25 की 448 संस्थाएं शामिल हैं।

सीआरसीएस के अनुसार, संबंधित संस्थाओं ने अपनी वार्षिक रिटर्न में निर्धारित लाभ के आधार पर सीईएफ में अनिवार्य अंशदान जमा करने की जानकारी दी थी। हालांकि, केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय के अभिलेखों और उपलब्ध बैंक विवरणों की जांच के दौरान कई मामलों में उक्त राशि प्राप्त होने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इसी कारण यह सत्यापन अभियान शुरू किया गया है।

अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सीआरसीएस ने सभी संबंधित संस्थाओं को निर्देश दिया है कि वे सात दिनों के भीतर सीआरसीएस के ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कोऑपरेटिव एजुकेशन फंड (सीईएफ) योगदान विंडो के माध्यम से भुगतान से संबंधित दस्तावेज अपलोड करें। इसके तहत बैंक लेनदेन का विवरण, यूटीआर नंबर, चालान अथवा रसीद तथा धनराशि के हस्तांतरण को दर्शाने वाली प्रमाणित बैंक स्टेटमेंट की प्रति जमा करनी होगी।

सहकारिता मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन संस्थाओं ने अभी तक सीईएफ में अनिवार्य अंशदान जमा नहीं किया है, वे निर्धारित राशि तत्काल जमा करें तथा निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान का विवरण और संबंधित दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करें।

सीआरसीएस ने चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि के भीतर भुगतान का प्रमाण प्रस्तुत नहीं करने अथवा बकाया अंशदान जमा न करने वाली संस्थाओं के विरुद्ध मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटीज अधिनियम, 2002 (संशोधित) तथा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में उत्पन्न होने वाले सभी परिणामों की जिम्मेदारी संबंधित डिफॉल्टर संस्था की होगी।

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