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जनता सहकारी बैंक, धाराशिव पर आरबीआई की कार्रवाई

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जनता सहकारी बैंक लिमिटेड, धाराशिव को बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के प्रावधानों के उल्लंघन में पाए गए निदेशकों को पद से हटाने के निर्देश दिए हैं।

यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ के आदेश के बाद की गई है। यह मामला पिराजी बाबूराव मंजुले एवं अन्य द्वारा दायर याचिका से संबंधित है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कुछ निदेशक सहकारी बैंकों के निदेशकों के लिए निर्धारित वैधानिक कार्यकाल सीमा के बावजूद पद पर बने हुए हैं।

हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में आरबीआई ने याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदनों की जांच की, उपलब्ध अभिलेखों की समीक्षा की तथा संबंधित निदेशकों की मौखिक दलीलों पर भी विचार किया।

इसके बाद आरबीआई ने याचिकाकर्ता को सूचित किया कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम के संबंधित प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले निदेशकों को पद से हटाने के लिए बैंक को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

आरबीआई ने यह भी बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद याचिकाकर्ता को अतिरिक्त लिखित अथवा मौखिक पक्ष रखने का अवसर दिया गया था, लेकिन इस संबंध में कोई अतिरिक्त प्रस्तुतीकरण प्राप्त नहीं हुआ। आवश्यक कार्रवाई करने के बाद केंद्रीय बैंक ने मामले में प्राप्त अभ्यावेदनों का निस्तारण कर दिया।

हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश और आरबीआई के पत्र में प्रभावित निदेशकों के नाम या संख्या का उल्लेख नहीं किया गया है। वहीं, एक स्थानीय मराठी दैनिक में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार बैंक के सात वर्तमान निदेशक, जिनमें पूर्व विधायक एवं वर्तमान उपाध्यक्ष वैजनाथ शिंदे भी शामिल हैं, कार्यकाल संबंधी प्रावधानों के तहत अयोग्य पाए गए हैं।

जनता सहकारी बैंक एक बहुराज्यीय शहरी सहकारी बैंक है, जिसका संचालन महाराष्ट्र के कई जिलों के साथ-साथ कर्नाटक के कुछ क्षेत्रों में भी होता है। बैंक के निदेशक मंडल के चुनाव आने वाले महीनों में प्रस्तावित हैं, ऐसे में आरबीआई की यह कार्रवाई विशेष महत्व रखती है।

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