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सौहार्द सहकारी बैंकों ने आरबीआई के ‘कूलिंग-ऑफ’ नियम पर मांगा स्पष्टीकरण

कर्नाटक स्टेट सौहार्द फेडरल कोऑपरेटिव लिमिटेड (केएसएसएफसीएल) ने बेंगलुरु में सौहार्द सहकारी बैंकों के अध्यक्षों, उपाध्यक्षों, निदेशकों और मुख्य कार्यपालक अधिकारियों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में सहकारी बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े हालिया नियामकीय परिवर्तनों पर विस्तृत चर्चा की गई।

कार्यक्रम का उद्घाटन सहकारिता समितियों के निबंधक कार्यालय के संयुक्त निबंधक (विधि प्रकोष्ठ) डॉ. सुरेश गौड़ा ने किया। उन्होंने राज्यभर में प्रभावी प्रशिक्षण एवं शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए केएसएसएफसीएल की सराहना की।

डॉ. गौड़ा ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम में हाल ही में किए गए संशोधनों तथा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक परिपत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि सहकारी बैंकों के अध्यक्षों के लिए लगातार दस वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद तीन वर्ष का ‘कूलिंग-ऑफ’ काल अनिवार्य किया गया है।

उन्होंने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दस वर्ष की अवधि की गणना पूर्व प्रभाव से होगी या आरबीआई के आदेश की तिथि से। इस संबंध में आरबीआई की स्पष्ट व्याख्या मिलने से दिशानिर्देशों को एकरूपता के साथ लागू करने में सुविधा होगी।

उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री पहले ही केंद्र सरकार को पत्र लिख चुके हैं। उन्होंने कहा कि नियामकीय निर्देशों के अनुपालन के साथ-साथ सहकारिता की मूल भावना को भी संरक्षित रखा जाना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केएसएसएफसीएल के अध्यक्ष जी. नंजनगौड़ा ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य आरबीआई के परिपत्र की विभिन्न व्याख्याओं पर विचार-विमर्श कर एक साझा समझ विकसित करना है। प्रबंध निदेशक शरंगौड़ा पाटिल ने कार्यशाला की विषय-वस्तु प्रस्तुत की, जबकि निदेशक राघुराम रेड्डी ने प्रतिभागियों का स्वागत किया।

आरबीआई अधिकारी शांतप्रकाश एस. ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस, नियामकीय अनुपालन तथा सहकारी बैंकों पर लागू आरबीआई दिशानिर्देशों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इसके बाद बैंकिंग विनियमन अधिनियम में संशोधनों और 25 मई, 2026 के आरबीआई परिपत्र पर परिचर्चा आयोजित की गई।

बैठक में निर्णय लिया गया कि इस विषय पर केंद्र सरकार को संयुक्त ज्ञापन सौंपा जाएगा, मुख्यमंत्री से अनुवर्ती कार्रवाई का अनुरोध किया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा। कार्यक्रम में 15 सौहार्द सहकारी बैंकों और दो शहरी सहकारी बैंकों के 37 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

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