ताजा खबरें

टीएसयू का तेजी से विस्तार, 16 संस्थान संबद्ध; 350 विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा को बताया कि त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय ने देश के सहकारी क्षेत्र को सशक्त बनाने के उद्देश्य से शिक्षा, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार किया है। विश्वविद्यालय ने पांच नए स्कूल स्थापित किए हैं, चार विशेषीकृत एमबीए पाठ्यक्रम शुरू किए हैं, 10 राज्यों के 16 संस्थानों को संबद्धता प्रदान की है तथा सहकारी क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों के लिए 32 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं।

राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में शाह ने बताया कि सहकारी क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ कोऑपरेटिव मैनेजमेंट, स्कूल ऑफ कोऑपरेटिव बैंकिंग एंड फाइनेंस, स्कूल ऑफ एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट, स्कूल ऑफ इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप तथा स्कूल ऑफ गवर्नेंस, डेवलपमेंट एंड पॉलिसी की स्थापना की गई है।

उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्र में पेशेवर प्रबंधकों की बढ़ती आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने कोऑपरेटिव मैनेजमेंट, कोऑपरेटिव बैंकिंग एंड फाइनेंस, एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट तथा डेवलपमेंट मैनेजमेंट एंड कोऑपरेशन में चार नए एमबीए कार्यक्रम भी शुरू किए हैं।

शाह ने बताया कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या 2025-26 के शैक्षणिक सत्र में 346 से बढ़कर 2026-27 में 350 हो गई है। ग्रामीण प्रबंधन (रूरल मैनेजमेंट) पाठ्यक्रम में सर्वाधिक नामांकन बना हुआ है, जबकि सहकारिता-केंद्रित नए एमबीए कार्यक्रमों में भी प्रवेश में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने अब तक 32 विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 887 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया है। इन कार्यक्रमों में सहकारिता, ग्रामीण विकास, सुशासन, नेतृत्व विकास, कृषि व्यवसाय तथा वित्तीय समावेशन जैसे विषयों को शामिल किया गया।

मंत्री ने बताया कि विश्वविद्यालय ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के पदाधिकारियों, सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों, महिला किसान उत्पादक कंपनियों, डेयरी सहकारी समितियों, पंचायत प्रतिनिधियों, राज्य सरकारों के अधिकारियों तथा कृषि एवं ग्रामीण विकास से जुड़े संस्थानों के लिए भी प्रशिक्षण एवं अध्ययन कार्यक्रम आयोजित किए हैं।

इन कार्यक्रमों में सहकारी समितियों के बीच सहयोग, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, नेतृत्व विकास, कृषि मूल्य श्रृंखला, महिला सशक्तिकरण तथा किसान उत्पादक संगठनों के प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए।

अमित शाह ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय ने कई महत्वपूर्ण परामर्श परियोजनाएं भी पूरी की हैं। इनमें भारत में महिला सहकारी समितियों की स्थिति का अध्ययन, पैक्स के व्यवसाय विविधीकरण, किसान उत्पादक संगठनों के लिए मूल्य जोखिम प्रबंधन, जैव ईंधन के प्रभाव का आकलन तथा महिलाओं के नेतृत्व वाले दीर्घकालिक ग्रामीण डेयरी आजीविका कार्यक्रम ‘श्वेतधारा’ पर श्वेत पत्र तैयार करना शामिल है।

देशभर में सहकारी शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए विश्वविद्यालय ने 10 राज्यों के 16 संस्थानों को संबद्धता प्रदान की है। इनमें वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान (वैमनिकॉम), एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया, बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी तथा विभिन्न इंस्टीट्यूट ऑफ कोऑपरेटिव मैनेजमेंट शामिल हैं।

शाह ने कहा कि एमबीए कार्यक्रमों के अलावा विश्वविद्यालय ने पैक्स के सचिवों एवं कर्मचारियों, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के निदेशकों तथा सहकारी बैंकों में कार्यरत साइबर सुरक्षा पेशेवरों के लिए विशेष प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी विकसित किए हैं, ताकि सहकारी क्षेत्र में पेशेवर प्रबंधन और डिजिटल क्षमताओं को और मजबूत किया जा सके।

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close