ताजा खबरें

शिक्षा ऋण क्रेडिट गारंटी योजना में सहकारी बैंकों को मिली नई भूमिका

भारत सरकार ने शिक्षा ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी फंड योजना (सीजीएफएसईएल) के तहत अनुसूचित राज्य सहकारी बैंकों और अनुसूचित शहरी सहकारी बैंकों को सदस्य ऋणदाता संस्थान (एमएलआई) के रूप में शामिल करने का प्रावधान किया है।

शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। इसके अनुसार, निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले अनुसूचित राज्य सहकारी बैंक और अनुसूचित शहरी सहकारी बैंक सीजीएफएसईएल के तहत एमएलआई के रूप में शामिल किए जा सकते हैं।

अधिसूचना के अनुसार, पात्रता के लिए संबंधित बैंक का भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की दूसरी अनुसूची में शामिल होना आवश्यक है। साथ ही, बैंक पिछले दो वित्तीय वर्षों के दौरान आरबीआई के सुपरवाइजरी एक्शन फ्रेमवर्क के अधीन नहीं रहा होना चाहिए। बैंक पर पिछले तीन वर्षों के दौरान कोई मौद्रिक दंड भी नहीं लगाया गया होना चाहिए।

वित्तीय और प्रदर्शन संबंधी मानदंडों के तहत बैंक का कैपिटल टू रिस्क (वेटेड) एसेट्स रेशियो (सीआरएआर) पिछले दो वित्तीय वर्षों में कम से कम 11.5 प्रतिशत होना चाहिए। इसके अलावा, पिछले ऑडिटेड वित्तीय वर्ष के अनुसार बैंक की न्यूनतम नेटवर्थ 100 करोड़ रुपये, सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (जीएनपीए) 7 प्रतिशत से कम और शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनएनपीए) 3 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।

बैंक ने पिछले चार वित्तीय वर्षों में से कम से कम तीन वर्षों में शुद्ध लाभ अर्जित किया हो, यह भी अनिवार्य शर्त है। यदि किसी वर्ष बैंक को शुद्ध घाटा हुआ है, तो उस वर्ष शहरी सहकारी बैंक के लिए परिचालन लाभ दर्ज करना आवश्यक होगा।

अधिसूचना के साथ जारी सूची में 34 अनुसूचित राज्य सहकारी बैंकों और 52 अनुसूचित शहरी सहकारी बैंकों को शामिल किया गया है। सूची में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारी बैंक शामिल हैं।

नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) इन अनुसूचित राज्य सहकारी बैंकों और अनुसूचित शहरी सहकारी बैंकों की पात्रता का समय-समय पर तथा वार्षिक आधार पर आकलन करेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना के तहत एमएलआई के रूप में शामिल बैंक निर्धारित पात्रता मानदंडों का लगातार अनुपालन करते रहें।

हालांकि, अधिसूचना में इन दोनों श्रेणियों के सहकारी बैंकों को शामिल किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक बैंक स्वतः ही सीजीएफएसईएल के तहत पात्र हो गया है। किसी बैंक को एमएलआई के रूप में शामिल होने के लिए निर्धारित सभी पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा और आगे भी उनका अनुपालन बनाए रखना होगा। एनसीजीटीसी के आवधिक और वार्षिक आकलन के आधार पर उनकी पात्रता और योजना के तहत भागीदारी जारी रहेगी।

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close