
यूनाइटेड थ्रिफ्ट एंड क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटीज फेडरेशन ने पावर गिल्ट ट्रेजरीज के सहयोग से रविवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में एक सेमिनार का आयोजन किया।
समारोह में दिल्ली के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (आरसीएस) कृष्ण कुमार सिंह, भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल के सदस्य सतीश मराठे, पावर गिल्ट ट्रेजरीज के प्रबंध निदेशक विनीत नाहटा तथा बड़ी संख्या में थ्रिफ्ट एंड क्रेडिट सहकारी समितियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रजिस्ट्रार कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि दिल्ली की नई सहकारिता नीति का मसौदा तैयार हो चुका है और फिलहाल कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार है। इसके बाद इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि सब कुछ योजना के अनुसार हुआ तो अगले छह महीनों के भीतर नई नीति लागू की जा सकती है।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि रजिस्ट्रार कार्यालय थ्रिफ्ट एंड क्रेडिट सहकारी समितियों के लिए आधार-आधारित डिजिटल डेटाबेस तैयार कर रहा है। इस प्रणाली का उद्देश्य ऐसे उधारकर्ताओं की पहचान करना है, जो अपनी मौजूदा देनदारियां छिपाकर अलग-अलग समितियों से कई ऋण लेते हैं। इससे ऋण वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी अंकुश लगेगा।
रजिस्ट्रार ने बताया कि विभाग वर्तमान में जारी सभी निर्देशों की भी समीक्षा कर रहा है, ताकि उन्हें कानून और नियमों के अनुरूप पूरी तरह अद्यतन किया जा सके।
अपने स्वागत भाषण में फेडरेशन के अध्यक्ष सुनील गुप्ता ने दिल्ली के सहकारी ढांचे में व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली सहकारी समितियां अधिनियम में अंतिम संशोधन वर्ष 2003 में हुआ था, जबकि इसके नियम 2007 में अधिसूचित किए गए थे। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अब इस कानून में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है।
उन्होंने दिल्ली में समर्पित सहकारी कैडर के अभाव का मुद्दा भी उठाया और कहा कि राजधानी के 17 शीर्ष (एपेक्स) सहकारी महासंघों में से लगभग 14 वित्तीय संकट, कमजोर आधारभूत संरचना तथा लंबित ऑडिट जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने सरकार से सहकारी संघ शिक्षा निधि की तर्ज पर वित्तीय सहायता तंत्र विकसित करने की मांग की।
पावर गिल्ट ट्रेजरीज के प्रबंध निदेशक विनीत नाहटा ने सहकारी संस्थाओं में बेहतर वित्तीय प्रबंधन और सुरक्षित निवेश रणनीति अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप कार्य करना चाहिए, ताकि वे समावेशी और सतत विकास की मजबूत आधारशिला बन सकें।
मुख्य वक्ता के रूप में आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल के सदस्य सतीश मराठे ने कहा कि भारत में आज दुनिया का सबसे बड़ा सहकारी आंदोलन है और देश के 65 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवार किसी न किसी सहकारी संस्था से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की स्थापना को ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि अब सहकारी क्षेत्र को आधुनिक कानून, दीर्घकालिक पूंजी तक आसान पहुंच, मजबूत नियामकीय व्यवस्था और पेशेवर पर्यवेक्षण की आवश्यकता है, ताकि यह क्षेत्र विकसित भारत के निर्माण में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सके।



