
महाराष्ट्र स्थित जलगांव जनता सहकारी बैंक लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार वित्तीय प्रदर्शन करते हुए 3,885.67 करोड़ रुपये का कुल कारोबार हासिल किया है। बैंक ने इस दौरान 19.43 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया।
यह जानकारी बैंक की 48वीं वार्षिक आम सभा में दी गई। सभा में बैंक के उपविधियों में कई महत्वपूर्ण संशोधनों का प्रस्ताव भी रखा गया, जिनमें निदेशक मंडल के सदस्यों की संख्या 17 से बढ़ाकर 21 करने का प्रस्ताव प्रमुखता से रखा गया।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान बैंक की जमा राशि 185.38 करोड़ रुपये बढ़कर 2,436.28 करोड़ रुपये हो गई, जबकि ऋण वितरण 90.58 करोड़ रुपये बढ़कर 1,449.39 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसके साथ बैंक का कुल कारोबार 3,885.67 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
बैंक के अध्यक्ष सतीश मदाने ने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद बैंक ने अपनी विकास यात्रा को मजबूती से जारी रखा। उन्होंने बताया कि बैंक का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (ग्रॉस एनपीए) अनुपात 3.35 प्रतिशत रहा, जबकि शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (नेट एनपीए) शून्य पर बनी रही।
उन्होंने बताया कि बैंक ने इंटरनेट बैंकिंग सेवा सफलतापूर्वक शुरू की है तथा भारतीय रिजर्व बैंक के सभी नियामकीय मानकों और ईसीबीए के दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन किया है। बैंक को वैधानिक लेखा परीक्षकों द्वारा ‘ए’ श्रेणी का ऑडिट वर्गीकरण भी प्राप्त हुआ है। बैंक लगातार अपने सदस्यों को 10 प्रतिशत लाभांश दे रहा है तथा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4,330 करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य निर्धारित किया है।
आम सभा में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि वार्षिक आम सभा और विशेष आम सभा की सूचनाएं एसएमएस, ई-मेल और व्हाट्सएप के माध्यम से भी भेजी जाएंगी। इसके अलावा, महत्वपूर्ण सूचनाएं और वित्तीय दस्तावेज बैंक की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि पारदर्शिता और सदस्यों की भागीदारी बढ़ाई जा सके।
उपविधियों में प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, निदेशक मंडल में आधे से अधिक सदस्यों के पास बैंकिंग, वित्त, विधि, लेखांकन, सहकारिता, कृषि अथवा संबंधित क्षेत्रों का अनुभव या योग्यता होना अनिवार्य होगा।
निदेशक पद के चुनाव के लिए पात्रता मानदंड में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। नए प्रावधानों के अनुसार, सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार के लिए 15,000 रुपये की अंश पूंजी और 1 लाख रुपये की सावधि जमा अनिवार्य होगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए 7,500 रुपये की अंश पूंजी और 50,000 रुपये की सावधि जमा का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
बैंक की एक उल्लेखनीय विशेषता यह भी रही कि पूरे वित्त वर्ष के दौरान निदेशकों ने बैठक भत्ता अथवा किसी प्रकार का मानदेय नहीं लिया। साथ ही, बैंक ने महिला सशक्तिकरण, स्वयं सहायता समूहों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के माध्यम से वित्तीय समावेशन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।



