
इफको के प्रबंध निदेशक के. जे. पटेल ने बुधवार को घाना गणराज्य की राष्ट्रपति कृषि एवं कृषि-व्यवसाय पहल (पीआईए) के तहत आए एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नई दिल्ली स्थित इफको सदन में स्वागत किया। इस दौरान कृषि, उर्वरक उत्पादन और सहकारिता क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को विस्तार देने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
घाना के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारत में घाना के उच्चायुक्त प्रो. क्वासी ओबिरी-डांसो और राष्ट्रपति कृषि एवं कृषि-व्यवसाय पहल (पीआईए) के निदेशक डॉ. पीटर बोआमा ओटोकुनोर ने किया। प्रतिनिधिमंडल में घाना के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल रहे।
बैठक के दौरान जैविक और अजैविक उर्वरकों के उत्पादन, कृषि विकास तथा घाना में सहकारी आंदोलन को मजबूत करने के लिए आपसी सहयोग की संभावनाओं पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया।
बैठक की जानकारी साझा करते हुए के. जे. पटेल ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी किसान-स्वामित्व वाली उर्वरक सहकारी संस्था के रूप में इफको नवाचार, ज्ञान के आदान-प्रदान और सहकारिता आधारित विकास के माध्यम से वैश्विक कृषि विकास में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इफको को करोड़ों किसानों के साथ काम करने, आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने, क्षमता निर्माण, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा संस्थागत विकास का व्यापक अनुभव है।
पटेल ने जोर देते हुए कहा कि किसानों को सशक्त बनाने, ग्रामीण आजीविका में सुधार और टिकाऊ कृषि विकास सुनिश्चित करने के लिए सहकारिताएं सबसे प्रभावी माध्यमों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि इफको घाना सहित साझेदार देशों के साथ सहकारी प्रबंधन, किसान शिक्षा, उर्वरक उत्पादन और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अपने दशकों के अनुभव और विशेषज्ञता को साझा करने के लिए तैयार है।
बैठक में कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने, खाद्य सुरक्षा में सुधार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने और दीर्घकालिक संस्थागत सहयोग के माध्यम से किसानों के लिए टिकाऊ अवसर पैदा करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
दोनों पक्षों ने घाना में कृषि परिवर्तन और सहकारी विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारत और घाना के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए एक रणनीतिक साझेदारी विकसित करने को लेकर आशावाद व्यक्त किया।
पटेल ने कहा कि यह बैठक कृषि और कृषि-व्यवसाय के क्षेत्र में किसानों के हित में भारत और घाना के बीच सहयोग को और गहरा करने की साझा सोच को दर्शाती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल एक दीर्घकालिक साझेदारी का मार्ग प्रशस्त करेगी तथा नवाचार, ज्ञान के आदान-प्रदान और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देगी।



