
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने ग्रामीण सहकारी बैंकों की निगरानी और संस्थागत मजबूती पर अपना फोकस बढ़ाते हुए वित्त वर्ष 2025-26 में व्यापक निरीक्षण और सुधार की पहल की। नाबार्ड की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान 34 राज्य सहकारी बैंकों और 268 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों का वैधानिक निरीक्षण किया गया। इसके अलावा आठ राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों का भी निरीक्षण किया गया।
इसी निगरानी व्यवस्था के तहत नाबार्ड ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के 43 नियमित निरीक्षण किए। बाद में 26 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के विलय से बने 11 नए बैंकों का भी निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान सामने आए मामलों पर कार्रवाई करते हुए नाबार्ड ने 65 स्पीकिंग ऑर्डर जारी किए और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, राज्य सहकारी बैंकों तथा जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों पर कुल 152.3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
निरीक्षण के साथ-साथ कमजोर बैंकों की स्थिति सुधारने पर भी जोर दिया गया। निरीक्षण रेटिंग के आधार पर श्रेणी ‘सी’ और ‘डी’ में आने वाले बैंकों तथा पर्यवेक्षी कार्रवाई ढांचा-स्वैच्छिक टर्नअराउंड पहल (एसएएफ-एसआईटीए) के तहत आने वाले बैंकों को व्यापक टर्नअराउंड प्लान (टीएपी) तैयार कर लागू करने की सलाह दी गई। इस पहल के दायरे में 96 बैंक आए और इनकी प्रगति की निगरानी नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा तिमाही समीक्षा के जरिए की गई।
बैंकों की निगरानी के साथ ग्राहकों की शिकायतों के समाधान को भी प्राथमिकता दी गई। 1 अप्रैल 2025 से नाबार्ड ने शिकायत प्रबंधन को सीपीजीआरएएमएस के माध्यम से केंद्रीकृत किया। वित्त वर्ष 2025-26 में निगरानी वाले संस्थानों के खिलाफ कुल 1,520 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें 233 प्रशासनिक और 1,287 बैंकिंग संबंधी शिकायतें थीं।
शिकायत निवारण को और आसान बनाने के लिए नाबार्ड ने ‘निवारण’ प्लेटफॉर्म को भी आगे बढ़ाया। इसके जरिए ग्राहक ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने, उसकी स्थिति देखने और जरूरत पड़ने पर उसे आगे भेजने की सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। फिलहाल 93 ग्रामीण सहकारी बैंक इस प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं।
निगरानी और शिकायत निवारण के साथ नाबार्ड ने तकनीकी आधुनिकीकरण को भी अपनी रणनीति का अहम हिस्सा बनाया है। नाबार्ड, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम और भागीदार ग्रामीण सहकारी बैंकों की समान भागीदारी वाली सहकार सारथी प्राइवेट लिमिटेड ने 31 मार्च 2026 तक 803.18 करोड़ रुपये की इक्विटी जुटाई। इसके जरिए डिजिटल बैंकिंग, साइबर सुरक्षा, आईटी गवर्नेंस, ऋण प्रसंस्करण और खातों के मिलान जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इसी डिजिटल बदलाव को आगे बढ़ाते हुए वित्त वर्ष 2025-26 में जेनरेटिव एआई के प्रयोग, बैंक.इन पर माइग्रेशन और केंद्रीकृत डिजिटल क्रेडिट प्लेटफॉर्म जैसी पहल की गईं। वहीं, 31 मार्च 2026 तक देश के ग्रामीण सहकारी ऋण ढांचे में 34 राज्य सहकारी बैंक, 353 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक और 1.06 लाख पैक्स शामिल थे।



