
पुणे स्थित वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान (वामनिकॉम) ने श्रीलंका में मत्स्य सहकारी समितियों को अधिक सक्षम और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से एक सप्ताह का अंतरराष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किया है। यह कार्यक्रम 15 से 22 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।
“श्रीलंकाई मत्स्य सहकारी समितियों के निर्माण एवं मजबूती के लिए भारतीय सहकारी समितियों का दौरा कराया जाएगा।” कार्यक्रम का आयोजन कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग और श्रीलंका के मत्स्य, जलीय एवं महासागरीय संसाधन मंत्रालय के सहयोग से किया जा रहा है।
कार्यक्रम के तहत श्रीलंकाई प्रतिनिधिमंडल को भारत की सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिल रहा है। इसमें सहकारी शासन, वित्तीय प्रबंधन, मछली खरीद, प्रसंस्करण, भंडारण, ब्रांडिंग, डिजिटल प्लेटफॉर्म और टिकाऊ मत्स्य गतिविधियों जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए श्रीलंका के मत्स्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव नादराजा सिवलिंगम ने क्षमता निर्माण और भारत-श्रीलंका के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल मछुआरा समुदायों को सशक्त बनाने और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है।
वहीं, वामनिकॉम के निदेशक डॉ. सुवा कांता मोहंती ने आजीविका, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास में मत्स्य क्षेत्र के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पेशेवर तरीके से संचालित और बेहतर शासन वाली सहकारी समितियां मछुआरा समुदायों को संस्थागत वित्त, बुनियादी ढांचे, बाजार तक पहुंच, जलवायु जोखिम और मछली पकड़ने के बाद होने वाले नुकसान जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकती हैं।
कार्यक्रम के दौरान श्रीलंकाई प्रतिभागी भारत की चुनिंदा सहकारी समितियों और संस्थानों का दौरा करेंगे तथा वहां अपनाई जा रही सफल कार्यप्रणालियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करेंगे। इन अनुभवों के आधार पर श्रीलंका के सामाजिक, आर्थिक और कानूनी वातावरण के अनुरूप मॉडल विकसित करने पर विचार किया जाएगा।
कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य मछुआरा समुदायों के लिए गुणवत्तापूर्ण इनपुट, वित्त, तकनीक और बाजार तक सामूहिक पहुंच को मजबूत करना है, ताकि उनकी आय और आजीविका में सुधार हो सके।
कार्यक्रम का नेतृत्व कार्यक्रम निदेशक डॉ. डी. रवि कर रहे हैं। इससे भारत और श्रीलंका के सहकारी संस्थानों तथा पेशेवरों के बीच एक स्थायी नेटवर्क विकसित होने की उम्मीद है, जो समावेशी और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ मत्स्य विकास के लिए काम करेगा।
उद्घाटन कार्यक्रम में पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना तथा भारत और श्रीलंका के राष्ट्रगान प्रस्तुत किए गए। वामनिकॉम की प्रोफेसर श्रीमती विजयश्री भागवत ने धन्यवाद ज्ञापन किया।



