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आरबीआई ने महाराष्ट्र के मंत्री को लातूर डीसीसीबी बोर्ड से हटाया

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक आदेश में लातूर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक लिमिटेड (लातूर डीसीसीबी) के उन निदेशकों को कानूनी प्रावधानों के तहत पद पर बने रहने के लिए अयोग्य करार दिया है, जिन्होंने दस वर्ष से अधिक का कार्यकाल पूरा कर लिया है।

आरबीआई ने शुक्रवार को बैंक के पूर्व कर्मचारी और शिकायतकर्ता सतीश शेषराव जाधव को भेजे पत्र में कहा कि लातूर डीसीसीबी को संबंधित अयोग्य निदेशक को पद से हटाने का निर्देश दिया गया है।

यह कार्रवाई जाधव की 25 मई 2026 की शिकायत के बाद हुई। उन्होंने आरोप लगाया था कि बैंक के आठ निदेशकों ने निर्धारित कार्यकाल सीमा पार कर ली है। मामला बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ पहुंचा। अदालत ने 3 अगस्त 2026 को आरबीआई को शिकायत पर गुण-दोष के आधार पर विचार कर निर्णय लेने और छह सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।

अदालत के निर्देश के बाद आरबीआई ने संबंधित आठ निदेशकों से जवाब मांगा। इसके बाद अशोक शिवाजीराव पाटील निलंगेकर, श्रीपतराव निवृत्तिराव काकडे, स्वयंप्रभा धनंजय पाटील, व्यंकटराव धोंडीराम बिराजदार, पृथ्वीराज हरिश्चंद्र शिरसाट, प्रमोद जाधव और नागोराव पाटील ने इस्तीफा दे दिया।

इन इस्तीफों के बाद महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटील बोर्ड में बने रहे। आरबीआई के शुक्रवार को भेजे पत्र में संबंधित निदेशक का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह कार्रवाई बाबासाहेब पाटील के खिलाफ है।

बाबासाहेब पाटील ने कार्यकाल संबंधी प्रावधान को अपने मौजूदा कार्यकाल पर लागू किए जाने पर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि इसे पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं किया जा सकता और मौजूदा बोर्ड का कार्यकाल 26 अक्टूबर 2026 को समाप्त होना था। उन्होंने आरबीआई के फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।

आरबीआई ने हालांकि यह तर्क स्वीकार नहीं किया कि मौजूदा कार्यकाल पर संबंधित प्रावधान लागू करना पूर्वव्यापी कार्रवाई होगी।

जाधव की शिकायत में उठाए गए अन्य दो मुद्दों को आरबीआई ने सहकार आयुक्त एवं सहकारी संस्थाओं के निबंधक, महाराष्ट्र को सूचना और आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दिया है।

आरबीआई के पत्र से स्पष्ट है कि एक अयोग्य पाए गए निदेशक को हटाने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, पत्र में यह नहीं कहा गया है कि शिकायत में नामित सभी आठ निदेशकों को अयोग्य पाया गया है या सभी को हटाने का आदेश दिया गया है।

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