
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) – जून 2026 के अनुसार, शहरी सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान और मजबूत हुई है। बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता, स्वस्थ ऋण वृद्धि और पर्याप्त पूंजीकरण के कारण यह क्षेत्र समग्र स्तर पर स्थिर बना हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, शहरी सहकारी बैंकों में ऋण वृद्धि मजबूत रही और मार्च 2026 तक कुल अग्रिमों में 9.6 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि अनुसूचित और गैर-अनुसूचित दोनों प्रकार के शहरी सहकारी बैंकों में देखने को मिली।
परिसंपत्ति गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। मार्च 2026 तक सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात (जीएनपीए) घटकर 5.2 प्रतिशत और शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात (एनएनपीए) घटकर 1.0 प्रतिशत पर आ गया।
बड़े उधारकर्ता खातों, जो कुल अग्रिमों का 22.7 प्रतिशत हैं, की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। इन खातों का जीएनपीए अनुपात घटकर 8.2 प्रतिशत रह गया, जबकि प्रावधान कवरेज अनुपात बढ़कर 97.8 प्रतिशत हो गया, जिसका मुख्य कारण गैर-अनुसूचित शहरी सहकारी बैंकों द्वारा बेहतर प्रावधान करना रहा।
पूंजी पर्याप्तता के मामले में सभी चार नियामकीय श्रेणियों में स्थिति संतोषजनक रही। पूंजी-से-जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर) 17.7 प्रतिशत पर रहा, जो नियामकीय न्यूनतम सीमा से काफी अधिक है। शुद्ध ब्याज आय में 2.4 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई, जबकि शुद्ध ब्याज मार्जिन में हल्का सुधार देखा गया।
हालांकि, लाभप्रदता में गिरावट दर्ज की गई है। परिसंपत्ति पर प्रतिफल (आरओए) घटकर 0.6 प्रतिशत और इक्विटी पर प्रतिफल (आरओई) 6.3 प्रतिशत पर आ गया।
आरबीआई द्वारा 500 करोड़ रुपये से अधिक परिसंपत्ति वाले 194 शहरी सहकारी बैंकों पर किए गए तनाव परीक्षण में पाया गया कि गंभीर तनाव परिदृश्यों में भी समेकित पूंजी-से-जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात नियामकीय सीमा से ऊपर बना रहेगा। हालांकि, कुछ टियर-2, टियर-3 और तीन टियर-4 शहरी सहकारी बैंकों में अत्यधिक ऋण केंद्रण और ब्याज दर झटकों की स्थिति में पूंजी की कमी या तरलता दबाव की संभावना जताई गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिसंबर 2025 से मई 2026 के बीच आरबीआई ने 99 विनियमित संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की, जिनमें 56 सहकारी बैंक शामिल हैं, और कुल 8.96 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।
आरबीआई ने यह भी रेखांकित किया कि भारत की बैंकिंग प्रणाली में सहकारी बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) के तहत कवर किए गए 1,950 बैंकों में से 1,826 सहकारी बैंक हैं।
सहकारी बैंकों में बीमित जमा का हिस्सा 60.1 प्रतिशत है, जो वाणिज्यिक बैंकों के 38.6 प्रतिशत से काफी अधिक है।
कुल मिलाकर आरबीआई ने कहा कि शहरी सहकारी बैंक बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और पर्याप्त पूंजीकरण के चलते अपनी वित्तीय स्थिति को लगातार मजबूत कर रहे हैं।



