
फेडरेशन ऑफ मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ के अध्यक्ष सुरेश वाबले ने सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण (सीईए) से नई पंजीकृत बहु-राज्यीय सहकारी समितियों के पहले चुनाव की समयसीमा छह माह से बढ़ाकर एक वर्ष करने तथा चुनाव कराने की जिम्मेदारी जिला कलेक्टरों के बजाय सहकारिता समितियों के निबंधक (आरसीएस) एवं उप/संभागीय निबंधकों (डीडीआर) को सौंपने की मांग की है।
वाबले ने ये सुझाव वैमनिकॉम, पुणे में आयोजित “सहकारी निर्वाचन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने हेतु व्यापक राष्ट्रीय ढांचा” विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय विचार-विमर्श के दौरान दिए। बैठक में सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण के अध्यक्ष देवेंद्र कुमार सिंह सहित सहकारिता क्षेत्र के कई वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ मौजूद थे।
वाबले ने कहा कि जिला कलेक्टर पहले से ही प्रशासनिक, कानून-व्यवस्था तथा विभिन्न चुनावी दायित्वों में व्यस्त रहते हैं, जिसके कारण वे सहकारी चुनावों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते। उन्होंने सुझाव दिया कि बहु-राज्यीय सहकारी समितियों के चुनाव कराने और उनकी निगरानी की जिम्मेदारी आरसीएस तंत्र तथा डीडीआर को सौंपी जानी चाहिए।
उन्होंने बहु-राज्यीय सहकारी समितियां नियम, 2002 के नियम-14 में संशोधन की भी मांग की। उनका कहना था कि नई पंजीकृत समितियों को सदस्यता अभियान पूरा करने, सदस्यों का सत्यापन करने, मतदाता सूची तैयार करने, प्रशासनिक ढांचा विकसित करने, बैंक खाते खोलने तथा अन्य वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करने के लिए अधिक समय की आवश्यकता होती है। ऐसे में पहले चुनाव के लिए छह माह की वर्तमान समयसीमा पर्याप्त नहीं है।
वाबले ने कहा कि इन सुधारों से सहकारी समितियों में चुनाव अधिक सुचारु, पारदर्शी एवं विवाद-मुक्त ढंग से संपन्न होंगे तथा सहकारिता क्षेत्र में लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
बैठक में देशभर में सहकारी चुनावों को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से व्यापक राष्ट्रीय ढांचे पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
इस अवसर पर वैमनिकॉम के निदेशक डॉ. सुवा कांता मोहंती, राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण के आयुक्त अनिल एम. कवाडे (सेवानिवृत्त आईएएस), फेडरेशन ऑफ मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव महाराष्ट्र एवं कर्नाटक के उपाध्यक्ष वी. एस. अंकलकोटे पाटिल, महाराष्ट्र के पूर्व अतिरिक्त आयुक्त कृष्णा वाडेकर तथा केंद्रीय सहकारिता समितियों के केंद्रीय निबंधक कार्यालय की उप-निबंधक शिल्पा कडू सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित थे।



