
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआईसीजीसी) ने 72 शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के जमाकर्ताओं के दावों के निपटारे के लिए 1,988 करोड़ रुपये का भुगतान किया।
ये सभी बैंक या तो परिसमापन (लिक्विडेशन) की प्रक्रिया में थे अथवा उन पर सर्वसमावेशी प्रतिबंध (ऑल-इन्क्लूसिव डायरेक्शंस) लागू किए गए थे।
रिपोर्ट के अनुसार, जमा बीमा योजना के अंतर्गत शामिल बैंकों में सहकारी बैंकों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। 31 मार्च 2026 तक डीआईसीजीसी के दायरे में कुल 1,950 बैंक थे, जिनमें 1,826 सहकारी बैंक शामिल थे। इनमें 1,440 शहरी सहकारी बैंक, 34 राज्य सहकारी बैंक और 352 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक शामिल हैं।
सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आरबीआई ने 1 अप्रैल 2026 से जमा बीमा हेतु जोखिम-आधारित प्रीमियम (रिस्क-बेस्ड प्रीमियम) व्यवस्था लागू की है। इसके तहत शहरी सहकारी बैंक, ग्रामीण सहकारी बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अलग टियर-2 ढांचे के अंतर्गत मूल्यांकित किए जाएंगे।
नई व्यवस्था के तहत बेहतर प्रबंधन और मजबूत जोखिम नियंत्रण वाले सहकारी बैंकों को मौजूदा 12 पैसे प्रति 100 रुपये की बीमायोग्य जमा राशि पर लागू समान प्रीमियम दर से कम प्रीमियम देना होगा। इससे बैंकों को बेहतर प्रशासन, अनुपालन और जोखिम प्रबंधन अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक जमा बीमा कोष बढ़कर रिकॉर्ड 2.62 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14.4 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा, देश के 97.5 प्रतिशत जमा खाते प्रति जमाकर्ता 5 लाख रुपये की बीमा सीमा तक पूरी तरह सुरक्षित हैं।



