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पांच दशक बाद यूसीबी के मॉडल बॉयलॉज की कवायद, आरबीआई ने बनाया पैनल

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लिए मॉडल उपविधियां (मॉडल बाई-लॉज) तैयार करने हेतु पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह पहल लगभग 47 वर्ष बाद की जा रही है। इससे पहले वर्ष 1979 में माधव दास समिति ने इस विषय पर कार्य किया था।

सोमवार को जारी एक परिपत्र में आरबीआई ने समिति के गठन की घोषणा की। समिति के अध्यक्ष महाराष्ट्र सरकार के सहकारिता विभाग के सेवानिवृत्त अतिरिक्त आयुक्त एवं विशेष निबंधक दिनेश ओलकर होंगे।

समिति के अन्य सदस्यों में डोंबिवली नागरी सहकारी बैंक लिमिटेड के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता गणेश धरगलकर, टीजेएसबी सहकारी बैंक लिमिटेड के निदेशक कवी आर.सी.वी. शेषाचलम, भारतीय रिजर्व बैंक के सेवानिवृत्त मुख्य महाप्रबंधक पी.के. अरोड़ा तथा पुणे स्थित कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल बैंकिंग के उप महाप्रबंधक एवं संकाय सदस्य मुरली कृष्ण एम. शामिल हैं।

आरबीआई के अनुसार, यह पहल 12 मई 2023 को गवर्नर के साथ हुई यूसीबी क्षेत्र की बैठक के दौरान प्राप्त सुझावों के आधार पर की गई है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 में वर्ष 2020 में किए गए संशोधनों के बाद, जिनके माध्यम से अधिनियम के कई प्रावधान सहकारी बैंकों पर भी लागू किए गए, यूसीबी क्षेत्र के लिए नई मॉडल उपविधियों की आवश्यकता महसूस की गई।

आरबीआई ने कहा कि प्रस्तावित मॉडल उपविधियों का उद्देश्य सुशासन को बढ़ावा देना, नियामकीय अनुपालन को मजबूत करना तथा शहरी सहकारी बैंकों के लिए पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को सुगम बनाना है।

समिति को मॉडल उपविधियों के मसौदे पर चर्चा कर उसे अंतिम रूप देने तथा अपनी सिफारिशें पहली बैठक की तिथि से तीन माह के भीतर आरबीआई को सौंपने का दायित्व दिया गया है। आरबीआई ने समिति के सदस्यों को बैठकों में भाग लेने के लिए बैठक शुल्क तथा अनुमन्य यात्रा एवं दैनिक भत्ते के भुगतान को भी मंजूरी दी है।

माना जा रहा है कि यह पहल शहरी सहकारी बैंकों के लिए एक समान प्रशासनिक ढांचा विकसित करने में सहायक होगी तथा भविष्य में क्षेत्र की नियामकीय और परिचालन संरचना को नई दिशा प्रदान करेगी।

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