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सीआरसीएस ने तीन सहकारी समितियों के परिसमापन की प्रक्रिया शुरू की

सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज (सीआरसीएस) कार्यालय ने मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज अधिनियम, 2002 के कथित उल्लंघन के आरोपों के आधार पर तीन बहुराज्यीय सहकारी समितियों के खिलाफ परिसमापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसे नियमों का पालन न करने वाली सहकारी संस्थाओं के खिलाफ केंद्र सरकार की सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

जिन समितियों के खिलाफ यह कार्रवाई शुरू की गई है, उनमें जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, स्वप्नवेध मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड तथा केएसबी मल्टीस्टेट कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड शामिल हैं। इन संस्थाओं पर जमाकर्ताओं की धनराशि वापस न करने, सहकारी लोकपाल के आदेशों का पालन न करने, वैधानिक रिटर्न जमा न करने तथा अधिकारियों के साथ सहयोग न करने के आरोप हैं।

केंद्रीय रजिस्ट्रार द्वारा जारी नोटिसों के अनुसार, जीवन मल्टी स्टेट और स्वप्नवेध मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी पर सहकारी लोकपाल द्वारा जमाकर्ताओं के धन की वापसी संबंधी दिए गए निर्देशों का पालन न करने का आरोप है। नोटिस में कहा गया है कि दोनों संस्थाओं ने लोकपाल के आदेशों के विरुद्ध कोई अपील दाखिल नहीं की और न ही सीआरसीएस द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित कई सुनवाइयों में भाग लिया।

अधिकारियों ने यह भी पाया कि महाराष्ट्र स्थित इन दोनों समितियों ने एमएससीएस अधिनियम, 2002 की धारा 120 के तहत अनिवार्य वार्षिक रिटर्न दाखिल नहीं किए। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार की लापरवाही से संस्थाओं की पारदर्शिता, वित्तीय जवाबदेही और वैधानिक दायित्वों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

केएसबी मल्टीस्टेट कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी के मामले में हरियाणा सहकारिता विभाग द्वारा किए गए निरीक्षण में पाया गया कि समिति पंचकूला स्थित अपने पंजीकृत कार्यालय से संचालित नहीं हो रही थी। जांच में यह भी सामने आया कि संस्था ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अनिवार्य वार्षिक रिटर्न भी जमा नहीं किए, जबकि इसके लिए उसे कई बार निर्देश दिए गए थे।

सीआरसीएस ने अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित नोटिसों के माध्यम से संबंधित पक्षों से 15 दिनों के भीतर आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इसके बाद एमएससीएस अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पिछले कुछ वर्षों में बहुराज्यीय सहकारी क्रेडिट समितियों के खिलाफ शिकायतों में वृद्धि हुई है। इनमें भुगतान में देरी, वित्तीय कुप्रबंधन और परिचालन संबंधी अनियमितताओं के आरोप प्रमुख रहे हैं। इसी के मद्देनजर नियामक संस्थाओं ने निगरानी और प्रवर्तन गतिविधियों को तेज किया है।

इस बीच, सीआरसीएस ने साईसेवा मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड के खिलाफ भी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में कार्रवाई शुरू की है। केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय ने संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। निरीक्षण के दौरान संस्था में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और एमएससीएस अधिनियम, 2002 के उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं।

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