
इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी और यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूएसआईबीसी) के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद भारत और अमेरिका के बीच कृषि सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। दोनों पक्षों ने नवाचार आधारित कृषि, सतत विकास और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
यूएसआईबीसी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, बैठक में भारत-अमेरिका कृषि सहयोग को मजबूत बनाने तथा कृषि क्षेत्र में नए अवसरों की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। परिषद ने इस संवाद को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
बैठक के दौरान नवाचार आधारित कृषि नीतियों, सतत ग्रामीण विकास और दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा जैसे विषयों पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि कृषि क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी, नवाचार और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देना आवश्यक है।
इफको की वैश्विक स्तर पर सक्रियता लगातार बढ़ रही है। दिलीप संघाणी के नेतृत्व में इफको ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों, ज्ञान के आदान-प्रदान और सहयोगात्मक रणनीतियों पर विशेष ध्यान दिया है, जिनका उद्देश्य भारतीय किसानों को लाभ पहुंचाना और कृषि क्षेत्र को अधिक सशक्त बनाना है।
बैठक से जुड़े सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों ने जलवायु परिवर्तन, कृषि उत्पादकता में वृद्धि, संसाधनों के कुशल उपयोग और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने जैसे उभरते मुद्दों पर भी विचार साझा किए। साथ ही इस बात पर चर्चा हुई कि भारत और अमेरिका आधुनिक कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में किस प्रकार मिलकर काम कर सकते हैं।
यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि भारत वैश्विक कृषि और सहकारी आंदोलनों में अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी उर्वरक सहकारी संस्थाओं में शामिल इफको किसानों के कल्याण, डिजिटल कृषि, नैनो उर्वरक प्रौद्योगिकी और टिकाऊ कृषि मॉडल के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के संवाद भविष्य में कृषि प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, निवेश और टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखला विकास के क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच नए सहयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। इससे नवाचार के आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और बेहतर बाजार पहुंच को भी बढ़ावा मिलेगा।



