
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित अटल अक्षय ऊर्जा भवन में महाराष्ट्र के सहकारी चीनी क्षेत्र और किसानों से जुड़े लंबित मुद्दों पर एक उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा अजित पवार, राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री, सहकारी क्षेत्र के प्रतिनिधि तथा कृषि क्षेत्र से जुड़े पदाधिकारी शामिल हुए।
बैठक में सहकारी चीनी मिलों और किसानों से संबंधित कई महत्वपूर्ण मांगों पर चर्चा हुई। इनमें चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि, एथेनॉल कोटा बढ़ाना, चीनी मिलों के ऋणों का पुनर्गठन, ब्याज अनुदान (इंटरेस्ट सबवेंशन) की लंबित राशि का भुगतान, किसानों से सीधे प्याज खरीद, कृषि उपज की ग्रेडिंग तथा प्याज बीज के निर्यात पर अधिभार लगाने जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि अमित शाह के साथ हुई चर्चा अत्यंत सकारात्मक रही। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार जल्द ही ऐसे निर्णय ले सकती है, जिनसे महाराष्ट्र के किसानों और सहकारी चीनी मिलों को बड़ी राहत मिलेगी।
फडणवीस के अनुसार, अमित शाह ने चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की आवश्यकता को स्वीकार किया है। साथ ही केंद्र सरकार ने अगले दो महीनों के भीतर एथेनॉल कोटा में उल्लेखनीय वृद्धि पर निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। माना जा रहा है कि इससे सहकारी चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और उनकी आय में बढ़ोतरी होगी।
बैठक में चीनी मिलों के ऋण पुनर्गठन पर भी चर्चा हुई। अमित शाह ने इस संबंध में महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर कार्य करने का आश्वासन दिया। इसके अलावा सहकारी चीनी मिलों को मिलने वाली ब्याज अनुदान की लंबित राशि जल्द जारी करने पर भी सहमति बनी।
एक अन्य महत्वपूर्ण विषय प्याज खरीद का रहा। महाराष्ट्र के प्रतिनिधियों ने मांग की कि राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) द्वारा प्याज की खरीद सीधे किसानों से की जाए, न कि कृषि उपज मंडियों के व्यापारियों के माध्यम से। केंद्र सरकार ने इस मांग पर सकारात्मक रुख दिखाया। साथ ही नेफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से प्याज खरीद को मौजूदा 2 लाख टन से बढ़ाकर 10 लाख टन करने पर भी चर्चा हुई।
बैठक में प्याज बीज के बड़े पैमाने पर निर्यात का मुद्दा भी उठाया गया। प्रतिनिधियों ने कहा कि इससे घरेलू बाजार और प्याज निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस पर प्याज बीज के निर्यात पर पर्याप्त अधिभार लगाने के प्रस्ताव को भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। हालांकि स्पष्ट किया गया कि फिलहाल प्याज के निर्यात पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
इसके अलावा हाल ही में बढ़ाए गए 15.80 रुपये प्रति किलोग्राम के खरीद मूल्य से अधिक मूल्य देने तथा मशीन आधारित ग्रेडिंग प्रणाली लागू करने के प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई, ताकि किसानों को उनकी उपज की गुणवत्ता के अनुसार उचित मूल्य मिल सके।
बैठक में आम उत्पादकों, विशेष रूप से अल्फांसो आम किसानों की समस्याओं पर भी विचार किया गया। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रभावित किसानों के लिए समाधान तलाशने हेतु बीमा कंपनियों के साथ बैठक आयोजित करने का आश्वासन दिया।
बैठक में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी भी उपस्थित रहे।



