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को-ऑप बैंकों को मिले सीएसआर का दर्जा: अनास्कर

महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक के प्रशासकीय बोर्ड के अध्यक्ष विद्याधर अनास्कर ने केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल को पत्र लिखकर ‘को-ऑपरेटिव सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी’ (सीएसआर) के लिए एक औपचारिक ढांचा लागू करने की मांग की है।

अपने पत्र में अनास्कर ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में सहकारी संस्थाओं और सहकारी बैंकों के दीर्घकालिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि ये संस्थाएं किसानों, लघु उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को वित्तीय सेवाएं प्रदान करने में अहम भूमिका निभाती रही हैं।

उन्होंने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां बड़ी कंपनियों के लिए अपने मुनाफे का एक हिस्सा सामाजिक विकास पर खर्च करना अनिवार्य है, वहीं सहकारी संस्थाएं ऐसे किसी संरचित ढांचे से बाहर हैं। उनके अनुसार, सहकारी क्षेत्र में भी सीएसआर जैसी व्यवस्था लागू होने से राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका और मजबूत हो सकती है।

अनास्कर ने महाराष्ट्र सहकारी सोसायटी अधिनियम के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके तहत सहकारी संस्थाएं अपने शुद्ध लाभ का 20 प्रतिशत तक जनकल्याण कार्यों पर खर्च कर सकती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के वर्तमान दिशानिर्देशों के अनुसार सहकारी बैंकों को पिछले वर्ष के शुद्ध लाभ का केवल 1 प्रतिशत तक ही दान करने की अनुमति है, जिससे सहकारी कानूनों की भावना और नियामकीय प्रतिबंधों के बीच असंगति उत्पन्न होती है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि एक व्यवस्थित सीएसआर ढांचे के माध्यम से सहकारी संस्थाएं वित्तीय साक्षरता, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में प्रभावी पहल कर सकती हैं। इससे न केवल समाज को लाभ होगा, बल्कि सहकारी क्षेत्र की विश्वसनीयता और सार्वजनिक छवि भी मजबूत होगी।

अनास्कर ने सहकारिता मंत्रालय से इस विषय पर नीतिगत निर्णय लेने का आग्रह किया है और भारतीय रिजर्व बैंक को उपयुक्त दिशा-निर्देश जारी करने की सलाह देने की मांग की है, ताकि सहकारी बैंक सक्रिय रूप से सीएसआर गतिविधियों में भाग ले सकें।

यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है जब सरकार सहकारी आंदोलन को पुनर्जीवित करने पर जोर दे रही है। माना जा रहा है कि सीएसआर को सहकारी क्षेत्र में शामिल करने से समावेशी और जमीनी स्तर पर विकास के नए अवसर खुल सकते हैं।

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